कुतूहल अध्याय 10 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किसी स्थानीय उद्यान के लिए एक क्षेत्र भ्रमण का आयोजन कीजिए। विविध पौधों की वृद्धि के लिए अपेक्षित परिस्थितियों और समय के विषय में जानने के लिए माली से बातचीत कीजिए।
उत्तर

क्या कीजिए: अपने शिक्षक के साथ नर्सरी, उद्यान या विद्यालय के बगीचे में जाइए। कॉपी साथ ले जाइए और प्रश्न जाने से पहले तैयार कर लीजिए— माली व्यस्त होता है, और अच्छे प्रश्नों के ही अच्छे उत्तर मिलते हैं।

पूछने योग्य प्रश्न—

  • कौन-से पौधे आप बीज से लगाते हैं और कौन-से कलम से?
  • बोने के कितने दिन बाद अंकुर निकलता है? फूल कब आते हैं?
  • कितनी बार जल देते हैं, और क्या ऋतु के साथ यह बदलता है?
  • किन पौधों को पूरी धूप चाहिए और किन्हें छाया?
  • कौन-सी खाद डालते हैं और कब?
  • कौन-से कीट परेशान करते हैं और आप क्या करते हैं?

अपने निष्कर्ष इस प्रकार की तालिका में लिखिए—

पौधाकिससे उगायाअंकुरण में दिनधूपसिंचाईपहले फूल / कटाई तक दिन
गेंदाबीज5–8 दिनपूरी धूपग्रीष्म में प्रतिदिनलगभग 50 दिन
धनियादला हुआ बीज8–12 दिनआंशिक धूपहल्का, प्रतिदिनकाटने योग्य 30–40 दिन
तुलसीबीज या कलम7–14 दिनपूरी धूपएक दिन छोड़करलगभग 3 माह
मनी प्लांटकलमजड़ें 10–15 दिन मेंछायामिट्टी नम रखिएघर के भीतर बहुत कम फूलता है
गुलाबकलम / कलमी पौधापूरी धूप (4–6 घंटे)एक दिन छोड़करछँटाई के 45–60 दिन बाद
संकेत: माली से एक “क्यों” वाला प्रश्न भी अवश्य पूछिए— जैसे, “बोने के बाद मिट्टी को दबाते क्यों हैं?” उत्तर (ताकि बड़े वायु-रिक्त स्थान हट जाएँ और बीज नम मिट्टी से चिपक जाए) बगीचे को सीधे क्रियाकलाप 10.2 से जोड़ देता है।
प्र2.
क्या हम पौधों को उनके बीजों को अंकुरित किए बिना उगा सकते हैं? पता लगाइए और कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर

हाँ। अनेक पौधे बीज के स्थान पर माता-पौधे के किसी भाग से उगाए जा सकते हैं। इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं, और माली तथा किसान इसका प्रतिदिन उपयोग करते हैं।

किस भाग सेउदाहरणकैसे किया जाता है
तने की कलमगुलाब, गुड़हल, मनी प्लांट, गन्ना, बोगनवेलिया, तुलसीदो-तीन कलिकाओं वाला तने का टुकड़ा नम मिट्टी में लगाया जाता है; दबे सिरे से जड़ें निकलती हैं
पत्तीब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा), सैनसेवीरिया, बिगोनियापत्ती के किनारों के खाँचों से कलिकाएँ फूटकर नए पौधे बनती हैं
भूमिगत तना / कंदआलू, अदरक, हल्दी, अरबी“आँख” वाली कलिकाओं सहित टुकड़े गाड़ने पर वे फूट पड़ते हैं
शल्ककंदप्याज, लहसुनएक कली या गाँठ मिट्टी में लगाने पर नया पौधा बनता है
जड़शकरकंद, डहेलियाफूली हुई जड़ की कलिकाओं से प्ररोह निकलते हैं
भूस्तारी / अंतर्भूस्तारीघास, स्ट्रॉबेरी, केला, पुदीनापार्श्व प्ररोह फैलकर पर्वसंधियों पर जड़ पकड़ लेते हैं और अलग पौधे बन जाते हैं
कलम बाँधना एवं दाब लगानाआम, अमरूद, लीची, नींबूअच्छी किस्म की टहनी को मजबूत जड़ वाले तने से जोड़ा जाता है, या शाखा को पौधे से जुड़े-जुड़े ही जड़ पकड़ने दिया जाता है
कुछ पौधों में माली यह विधि क्यों पसंद करते हैं: कलम से उगा पौधा अपने माता-पौधे की हूबहू प्रतिकृति होता है, इसलिए मीठे आम से मीठे ही आम मिलते हैं। वह फल भी बहुत जल्दी देने लगता है— कलमी आम तीन-चार वर्ष में, जबकि बीज से उगा आम आठ वर्ष या उससे भी अधिक ले सकता है। दूसरी ओर बीज सस्ते होते हैं और उन्हें रखना तथा ले जाना सरल है।
यह कीजिए: मनी प्लांट का एक पर्वसंधि वाला टुकड़ा जल भरी बोतल में खिड़की पर रखिए। सप्ताह में दो बार जल बदलिए। लगभग दस दिन में पर्वसंधि से सफेद जड़ें निकलती दिखेंगी— नया पौधा तैयार, और बीज कहीं नहीं।
प्र3.
अपने घर, विद्यालय अथवा आस-पास के किसी उद्यान में उग रहे पाँच पौधों के जीवन-चक्र का अवलोकन कीजिए। उनकी वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं के चित्रों के साथ एक चित्र पुस्तिका (पिक्चर बुक) बनाइए। प्रत्येक पौधे का नाम लिखिए और उसकी प्रत्येक अवस्था की समयावधि को लिखिए।
उत्तर

चित्र पुस्तिका कैसे बनाएँ—

  1. पाँच तेज़ी से बढ़ने वाले पौधे चुनिए ताकि काम एक ही ऋतु में पूरा हो जाए— मूँग, चना, धनिया, गेंदा और सरसों अच्छे विकल्प हैं।
  2. प्रत्येक पौधे को दो पृष्ठ दीजिए। ऊपर उसका नाम और बोने की तिथि लिखिए।
  3. उसे पाँच निश्चित अवस्थाओं में बनाइए या फोटो लीजिए: बीज, अंकुरण, पहली पत्तियाँ, फूल, फल या बीज बनना।
  4. हर चित्र के साथ तिथि और बोने से कितने दिन हुए, यह अवश्य लिखिए। यही बात चित्रों के संग्रह को एक अभिलेख बना देती है।
  5. अंतिम पृष्ठ पर पाँचों पौधों की एक तुलनात्मक तालिका बनाइए।
पौधाअंकुरणपहली वास्तविक पत्तियाँपहला फूलफल / बीज
मूँगदिन 2–3दिन 6–8दिन 30–35दिन 55–65
चनादिन 4–6दिन 9–12दिन 45–55दिन 90–110
धनियादिन 8–12दिन 15–18दिन 45–55दिन 80–90
गेंदादिन 5–8दिन 12–15दिन 45–60दिन 75–90
सरसोंदिन 3–5दिन 8–10दिन 40–50दिन 85–100
संकेत: हर फोटो में पौधे के पास एक स्केल या सिक्का रखिए। तब चित्र न केवल हर अवस्था का रूप दिखाएँगे, बल्कि यह भी बताएँगे कि दो अवस्थाओं के बीच पौधा कितना बढ़ा।
प्र4.
एक तितली अथवा एक पतंगा (मॉथ) के जीवन-चक्र की कुछ अवस्थाओं का अवलोकन करने का प्रयास कीजिए। क्या ये अवस्थाएँ मच्छरों के जीवन-चक्र की अवस्थाओं के समान होती हैं?
उत्तर

हाँ— अवस्थाएँ ठीक वही चार हैं, अंतर केवल इतना कि वे जल के बजाय थल पर बीतती हैं।

अवस्थातितलीमच्छर
अंडापत्ती की निचली सतह पर— नींबू, कढ़ी पत्ता और आक के पौधों पर देखिएस्थिर जल पर या उसके समीप
लार्वाइल्ली— पत्तियाँ खूब खाती है और तेजी से बढ़ती हैजल में तड़पता लार्वा— भोजन लेकर बढ़ता है
प्यूपाकोया या कोकून, टहनी से लटका स्थिर; भोजन नहीं लेताजल में कॉमा जैसा प्यूपा; भोजन नहीं लेता
वयस्कपंखों वाली तितली जो उड़ती है और मकरंद पीती हैपंखों वाला मच्छर; मादा खून चूसती है

अंतर कहाँ है: तितली के लार्वा और प्यूपा थल पर, पौधे पर रहते हैं; मच्छर के जल में। तितली का पूरा चक्र लगभग एक माह लेता है, मच्छर का केवल एक-दो सप्ताह।

क्या आप जानते हैं? रेशम कीट (सिल्क मॉथ) भी जीवन की चार अवस्थाओं से गुजरता है— अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क। प्यूपा में बदलने से पहले लार्वा धागे जैसा पदार्थ स्रावित करते हैं जो उनके चारों ओर लिपट जाता है। ये वही रेशे हैं जिनका उपयोग रेशमी वस्त्र बनाने में किया जाता है। भारत में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने रेशम के उत्पादन के लिए अनेक केंद्र स्थापित किए हैं।
सामान्य प्रतिरूप: बहुत-से कीट इसी अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क मार्ग से गुजरते हैं। लार्वा खाने और बढ़ने की अवस्था है, प्यूपा नए सिरे से शरीर बनने की, और वयस्क उड़ने तथा जनन करने की।
प्र5.
आपके विचार में क्या पर्यावरण कीटों के जीवन-चक्र को प्रभावित करता है? कीटों के जीवन-चक्र को प्रभावित करने वाले कारकों का पता लगाइए और उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर

हाँ, और बहुत प्रबल रूप से। वही कीट एक ऋतु में अपना चक्र बहुत तेज़ी से पूरा करता है और दूसरी ऋतु में बहुत धीमे— और किसी वर्ष तो पूरा कर ही नहीं पाता।

कारकजीवन-चक्र पर प्रभावजो आप देख सकते हैं
तापमानगरमी हर अवस्था को तेज़ करती है; ठंड उसे धीमा कर देती है या रोक देती हैवर्षा ऋतु में मच्छर हर ओर, उत्तर भारत की दिसंबर में बहुत कम
जल / आर्द्रतामच्छर के अंडे, लार्वा और प्यूपा स्थिर जल के बिना विकसित हो ही नहीं सकतेवर्षा आरंभ होने के कुछ सप्ताह बाद डेंगू के मामले बढ़ जाते हैं
भोजन की उपलब्धतापत्ते समाप्त होने पर इल्ली धीरे बढ़ती है, छोटी रह जाती है या मर जाती हैनींबू के पौधे पर इल्लियाँ तभी मिलती हैं जब उस पर ताजी पत्तियाँ हों
प्रकाश एवं दिन की लंबाईअनेक कीटों के निकलने, मिलने और ऋतु भर सुप्त रहने का समय तय करती हैरात में ट्यूबलाइट के चारों ओर पतंगों का झुंड
परभक्षीमेंढक, छिपकली, पक्षी, मकड़ी और मछलियाँ अंडे तथा लार्वा खा जाते हैं, अतः कम ही वयस्क बन पाते हैंटंकी में डाली गप्पी मछलियाँ उसे लार्वा से मुक्त रखती हैं
मानव गतिविधिकीटनाशक, मिट्टी के तेल का छिड़काव, जल निकासी और कचरे की सफाई चक्र तोड़ देते हैं; खुली नालियाँ और कूड़ा उसे बढ़ाते हैंघर में साप्ताहिक “शुष्क दिवस” से मच्छर स्पष्ट रूप से घट जाते हैं
प्रदूषणगंदा जल और प्रदूषित वायु कुछ कीटों को मार देती है और कुछ को बढ़ावा देती हैकुछ मच्छर प्रदूषित नालियों में सहजता से पनपते हैं
यह हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है: यदि जीवन-चक्र को पर्यावरण नियंत्रित करता है, तो पर्यावरण बदलना ही कीट को नियंत्रित करने का सर्वोत्तम उपाय है। कूलर खाली करना, मिट्टी का तेल छिड़कना या गप्पी मछलियाँ पालना ठीक यही कर रहा है— आप मच्छरों के पीछे नहीं भाग रहे, उनके जीवन-चक्र के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हटा रहे हैं।
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