प्र1.
नीचे दी गई अधूरी कविता में कुछ और पंक्तियाँ जोड़िए। इसमें मेंढक के विकास की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में सूचनाओं को सम्मिलित कीजिए। आप अपनी कविता में प्रदर्शित प्रत्येक अवस्था का चित्र बनाकर उसमें रंग भी भर सकते हैं। — “एक छायादार और तृणमय दलदल के किनारे, / झुंड में रहते थे मेंढक कई सारे, / शाम से सुबह तक गाते थे वो गाना, / पंचम सुर में छेड़कर तराना, / एक दिन बैठकर नरकट के पास, / मेंढकी ने सोची बात यह खास, / प्रजनन का है समय सही, होता मुझे है आभास…”
उत्तर
आपकी कविता में तुक के साथ-साथ विज्ञान भी होना चाहिए। लिखने से पहले अवस्थाओं का क्रम लिख लीजिए ताकि कोई छूट न जाए—
जलांडक (अंडों का जेली जैसा समूह) → भ्रूण → पूँछ वाला टैडपोल → पैरों वाला टैडपोल → मंडूक → वयस्क मेंढक
नमूना उत्तर— अंतिम छपी पंक्ति से आगे, उसी लय में—
जेली में लिपटे अंडे दिए जल के किनारे,
सफेद-से जलांडक तैरें सारे।
तीन-चार दिन में झाँका भीतर से भ्रूण,
नन्ही-सी काया, नन्हा-सा गुण।
सातवें दिन निकले टैडपोल कई,
पूँछ थी लंबी, पर टाँगें नहीं।
पूँछ ही पतवार, पूँछ ही चाल,
घास-काई खाकर बीते दिन-रात।
आठ-दस सप्ताह में निकले दो पैर,
पूँछ अब भी थी, पर बढ़ी थी लहर।
बारह सप्ताह में मंडूक कहलाया,
जल में रहकर थल पर भी आया।
चौदह सप्ताह में पूँछ हुई लुप्त,
पैरों में आई कूदने की शक्ति।
जल और थल— दोनों का वासी,
अब बन बैठा तालाब का राजा।
फिर वर्षा आई, फिर वही तान,
फिर अंडे दिए, फिर वही गान।
घूमे यों जीवन का पहिया सारा—
अंडे से मेंढक, मेंढक से दोबारा।
सफेद-से जलांडक तैरें सारे।
तीन-चार दिन में झाँका भीतर से भ्रूण,
नन्ही-सी काया, नन्हा-सा गुण।
सातवें दिन निकले टैडपोल कई,
पूँछ थी लंबी, पर टाँगें नहीं।
पूँछ ही पतवार, पूँछ ही चाल,
घास-काई खाकर बीते दिन-रात।
आठ-दस सप्ताह में निकले दो पैर,
पूँछ अब भी थी, पर बढ़ी थी लहर।
बारह सप्ताह में मंडूक कहलाया,
जल में रहकर थल पर भी आया।
चौदह सप्ताह में पूँछ हुई लुप्त,
पैरों में आई कूदने की शक्ति।
जल और थल— दोनों का वासी,
अब बन बैठा तालाब का राजा।
फिर वर्षा आई, फिर वही तान,
फिर अंडे दिए, फिर वही गान।
घूमे यों जीवन का पहिया सारा—
अंडे से मेंढक, मेंढक से दोबारा।
यह उत्तर अच्छा क्यों है: इसमें छहों अवस्थाएँ सही क्रम में आई हैं और चित्र 10.8 की सही समयावधियाँ भी (दिन 3–4, दिन 7–10, 8–10 सप्ताह, 12 सप्ताह, 14 सप्ताह)। तुक विज्ञान को हटाती नहीं, उसे उठाकर ले चलती है, और अंतिम छंद चक्र को फिर आरंभ तक ले आता है— जीवन-चक्र यही तो करता है।
चित्र के लिए संकेत: पृष्ठ के किनारे छह छोटे खाने बनाइए, हर अवस्था के लिए एक, और नीचे उसकी आयु लिखिए— दिन 1, दिन 3–4, दिन 7–10, 8–10 सप्ताह, 12 सप्ताह, 14 सप्ताह। तब आपकी कविता और आपका चित्र एक ही कहानी दो बार कहेंगे।