कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मेंढक के ये अंडे उन अन्य अंडों से किस प्रकार भिन्न हैं, जो आपने पहले कभी देखे हैं?
उत्तर

मेंढक के अंडों की तुलना रसोई में दिखने वाले मुर्गी के अंडे से कीजिए।

लक्षणमेंढक के अंडे (जलांडक)मुर्गी का अंडा
आवरणमुलायम, पारदर्शी जेली, कोई कठोर खोल नहींकठोर, भुरभुरा कैल्सियम का खोल
संख्यासैकड़ों, एक साथ जुड़े हुए सफेद जेली जैसे समूह में— जलांडकएक बार में एक
आमाप और रंगबहुत छोटे, प्रत्येक पारदर्शी गोले के भीतर काला बिंदुबड़ा, सफेद या भूरा
कहाँ दिए जाते हैंतालाब के किनारे जल की सतह पर तैरते हुए, प्रायः जल में या आस-पास उगने वाले पौधों से संलग्नथल पर, घोंसले में
माता-पिता की देखभालकोई नहीं— अंडे स्वयं विकसित होते हैंमुर्गी उन पर बैठकर उन्हें गरम रखती है
क्या भीतर दिखता है?हाँ— जेली के आर-पार विकसित होता भ्रूण दिखाई देता हैनहीं— खोल अपारदर्शी है
मेंढक के अंडों को खोल की आवश्यकता क्यों नहीं: खोल वायु में दिए अंडे को सूखने से बचाता है। मेंढक के अंडे तो जल में ही हैं, अतः वे सूख ही नहीं सकते। जेली इसके बदले तीन दूसरे काम करती है— अंडों को जोड़े रखती है, समूह को फिसलनदार और कई शिकारियों के लिए अरुचिकर बनाती है, और जल सोखकर फूल जाने से अंडों को गद्दी देती है। फिर भी बहुत-से अंडे खा लिए जाते हैं, इसीलिए मेंढकी सैकड़ों अंडे देती है ताकि कुछ तो बचें।
प्र2.
कौन-सी अवस्था की अवधि सबसे कम होती है?
उत्तर

अंडा अवस्था सबसे कम अवधि की होती है। चित्र 10.8 में छपी अवधियाँ देखिए—

अवस्थाकब आती हैलगभग कितनी चलती है
अवस्था Iक— जलांडकदिन 12–3 दिन  (सबसे कम)
अवस्था Iख— भ्रूणदिन 3–4लगभग 4–6 दिन
अवस्था IIक— पूँछ वाला टैडपोलदिन 7–10लगभग 7 सप्ताह
अवस्था IIख— पैरों वाला टैडपोल8–10 सप्ताहलगभग 2–3 सप्ताह
अवस्था III— मंडूक12 सप्ताहलगभग 2 सप्ताह
अवस्था IV— वयस्क मेंढक14 सप्ताहशेष जीवन
दिन 1 → दिन 3–4  =  अंडे के रूप में केवल लगभग 3 दिन
अंडा अवस्था इतनी जल्दी क्यों बीत जाती है: अंडा न तैर सकता है, न छिप सकता है, न भोजन ले सकता है। वह पूर्णतः असहाय है और मछलियाँ, कीट तथा पक्षी उसे खा जाते हैं। जितनी जल्दी वह ऐसे टैडपोल में बदल जाए जो कम से कम तैरकर भाग सके, उतना ही उसके बचने की संभावना बढ़ती है।
प्र3.
क्या मेंढक के जीवन-चक्र की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान उनके आवास में कोई परिवर्तन होता है?
उत्तर

हाँ— और यही मेंढक की सबसे विलक्षण बात है। वह जीवन पूर्णतः जल में आरंभ करता है और अंत में जल तथा थल दोनों में रहने योग्य हो जाता है।

अवस्थाआवासउसके अनुकूल शारीरिक लक्षण
अंडा / भ्रूणकेवल जलमुलायम जेली का आवरण जो सूख नहीं सकता
पूँछ वाला टैडपोलकेवल जलतैरने के लिए लंबी पूँछ; पैर नहीं
पिछले पैरों वाला टैडपोलकेवल जलपूँछ अब भी है, पीछे के पैर बनने लगे
मंडूकअधिकतर जल, किंतु कुछ समय थल पर भी बिताना आरंभचार पैर, पूँछ छोटी होती जाती है
वयस्क मेंढकजल और थल दोनोंपूँछ नहीं; कूदने और उतरने के लिए मजबूत पिछले पैर
यह परिवर्तन संभव कैसे होता है: आवास बदलने के साथ-साथ शरीर भी नए सिरे से बनता जाता है। थल पर बेकार पूँछ धीरे-धीरे शरीर में समा जाती है; और पैर, जो पानी में तैरते जीव के लिए किसी काम के नहीं, तभी बनते हैं जब उनकी आवश्यकता पड़नी है। यही विचार आपने मच्छर में भी देखा था— शिशु और वयस्क अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं और उसी के अनुसार बने होते हैं।
प्र4.
उस अवस्था में विशिष्ट विशेषताएँ किस प्रकार सहायक होती हैं?
उत्तर

प्रत्येक अवस्था का प्रत्येक लक्षण किसी कारण से है। उन्हें मिलाकर देखिए।

अवस्थाविशिष्ट लक्षणवह किस प्रकार सहायक है
जलांडकएक ही जेली में सैकड़ों अंडेबहुत-से खा लिए जाते हैं, अतः अधिक संख्या कुछ के बचने की सुनिश्चितता देती है; जेली उन्हें जोड़े रखती और गद्दी देती है
टैडपोल (आरंभिक)लंबी पूँछ, पैर नहींपूँछ उन्हें जल में तैरने में सहायता करती है— वही एकमात्र स्थान है जहाँ वे रह और खा सकते हैं
टैडपोल (बाद की)पूँछ रहते हुए ही पिछले पैर निकल आते हैंवह तालाब की तली पर धक्का देकर चलना सीख लेता है और अभी तैर भी अच्छी तरह सकता है
मंडूकचार पैर, पूँछ घटती हुई; वह अब भी जल में रहता है किंतु कुछ समय थल पर भी बिताने लगता हैयह सुरक्षित बीच की अवस्था है— थल पर चलने का अभ्यास और तुरंत जल में लौटने की सुविधा
वयस्क मेंढकपूँछ पूर्णतः लुप्त; पैर मजबूत हो जाते हैं जिससे कूदकर स्थल पर आने में सहायता मिलती हैलंबी छलाँग से वह थल पर कीट पकड़ लेता है और शिकारी से एक ही छलाँग में तालाब में लौट सकता है

पुस्तक के अनुसार: टैडपोल के पिछले पैर विकसित हो जाते हैं किंतु उनकी पूँछ बनी रहती है; धीरे-धीरे वे छोटे मेंढक जैसे दिखने लगते हैं जिन्हें मंडूक कहते हैं; वे बड़े होते जाते हैं और उनकी पूँछ पूर्णतः लुप्त हो जाती है; पूर्ण विकसित वयस्क मेंढक बनने पर वे जल और थल दोनों में रहने लगते हैं।

क्या आप जानते हैं? पूँछ यों ही फेंकी नहीं जाती। उसका पदार्थ शरीर में वापस सोख लिया जाता है और मंडूक के बदलते समय काम आता है— इसीलिए मंडूक कुछ समय बहुत कम खाकर भी काम चला लेता है।
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