प्र1.
मेंढक के ये अंडे उन अन्य अंडों से किस प्रकार भिन्न हैं, जो आपने पहले कभी देखे हैं?
उत्तर
मेंढक के अंडों की तुलना रसोई में दिखने वाले मुर्गी के अंडे से कीजिए।
| लक्षण | मेंढक के अंडे (जलांडक) | मुर्गी का अंडा |
|---|---|---|
| आवरण | मुलायम, पारदर्शी जेली, कोई कठोर खोल नहीं | कठोर, भुरभुरा कैल्सियम का खोल |
| संख्या | सैकड़ों, एक साथ जुड़े हुए सफेद जेली जैसे समूह में— जलांडक | एक बार में एक |
| आमाप और रंग | बहुत छोटे, प्रत्येक पारदर्शी गोले के भीतर काला बिंदु | बड़ा, सफेद या भूरा |
| कहाँ दिए जाते हैं | तालाब के किनारे जल की सतह पर तैरते हुए, प्रायः जल में या आस-पास उगने वाले पौधों से संलग्न | थल पर, घोंसले में |
| माता-पिता की देखभाल | कोई नहीं— अंडे स्वयं विकसित होते हैं | मुर्गी उन पर बैठकर उन्हें गरम रखती है |
| क्या भीतर दिखता है? | हाँ— जेली के आर-पार विकसित होता भ्रूण दिखाई देता है | नहीं— खोल अपारदर्शी है |
मेंढक के अंडों को खोल की आवश्यकता क्यों नहीं: खोल वायु में दिए अंडे को सूखने से बचाता है। मेंढक के अंडे तो जल में ही हैं, अतः वे सूख ही नहीं सकते। जेली इसके बदले तीन दूसरे काम करती है— अंडों को जोड़े रखती है, समूह को फिसलनदार और कई शिकारियों के लिए अरुचिकर बनाती है, और जल सोखकर फूल जाने से अंडों को गद्दी देती है। फिर भी बहुत-से अंडे खा लिए जाते हैं, इसीलिए मेंढकी सैकड़ों अंडे देती है ताकि कुछ तो बचें।