कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपके विचार से कौन-सी अन्य परिस्थितियाँ बीज के अंकुरण को प्रभावित करेंगी?
उत्तर

जल, वायु और प्रकाश के अतिरिक्त भी कई बातें तय करती हैं कि बीज अंकुरित होगा या नहीं।

परिस्थितिअंकुरण पर प्रभावरोजमर्रा का प्रमाण
तापमानभारत की अधिकांश फसलों के बीज लगभग 20 °C से 35 °C के बीच सर्वोत्तम अंकुरित होते हैं। बहुत ठंडा या बहुत गरम होने पर अंकुरण धीमा पड़ता है या रुक जाता है।जून में मूँग एक दिन में अंकुरित हो जाती है, दिसंबर में तीन दिन लेती है
बीज की गुणवत्ता और आयुक्षतिग्रस्त, कीट-खाया, भुना हुआ या बहुत पुराना बीज— उसका भ्रूण मर चुका होता है और वह कभी अंकुरित नहीं होगाभुना चना कभी नहीं फूटता
बोने की गहराईबहुत गहरा बोने पर प्ररोह सतह तक पहुँचने से पहले ही संचित भोजन समाप्त कर देता है; ऊपर रह जाने पर बीज सूख जाता हैकिसान छोटे बीज उथले और बड़े बीज कुछ गहरे बोते हैं
मिट्टी का प्रकारभुरभुरी दोमट मिट्टी जल और वायु दोनों रोकती है; कड़ी चिकनी मिट्टी में जल तो है पर वायु कम; बालू में जल टिकता ही नहींजुते खेत में बीज पगडंडी की अपेक्षा कहीं अच्छे उगते हैं
पोषक तत्व (खाद)अंकुरण के लिए स्वयं आवश्यक नहीं, किंतु उसके बाद नवोद्भिद की वृद्धि के लिए अनिवार्यरसोई-बगीचे की क्यारी में डाली गई कंपोस्ट
जल एवं मिट्टी की लवणताबहुत खारा जल बीज को जल सोखने ही नहीं देतारेह वाली भूमि पर कुछ नहीं उगता
यह कीजिए: इनमें से किसी एक के लिए निष्पक्ष परीक्षण बनाइए— जैसे गहराई। तीन एक जैसे गमलों में 1 सेमी, 3 सेमी और 8 सेमी गहराई पर फली के बीज बोइए और जल, वायु तथा प्रकाश तीनों समान रखिए। तभी दिखने वाला अंतर केवल गहराई के कारण होगा। (अभ्यास का प्रश्न 9 आपसे यही काम तापमान के लिए करवाता है।)
प्र2.
सजीवों की कौन-सी विशेषताओं के कारण आपने क्रियाकलाप 10.1 में पौधों को सजीवों की श्रेणी में रखा? क्या क्रियाकलाप 10.2 में पौधों में वृद्धि दिखाई देती है? क्या सजीवों की अन्य कोई विशेषता इन पौधों में दिखाई देती है?
उत्तर

क्रियाकलाप 10.1 में पौधों को सजीव क्यों माना: वे वृद्धि करते हैं, उन्हें जल, वायु और पोषक तत्व चाहिए, वे रंध्रों से श्वसन करते हैं, पत्तियों पर बूँदें उत्सर्जित करते हैं, स्पर्श और प्रकाश जैसे उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करते हैं, बीजों द्वारा जनन करते हैं और अंततः मर जाते हैं।

क्या क्रियाकलाप 10.2 में वृद्धि दिखती है? हाँ, बहुत स्पष्ट रूप से।

दिनगमला ‘घ' में क्या दिखता है
दिन 0मिट्टी के भीतर एक सूखा, कठोर फली का बीज
दिन 2–3बीज फूल गया है; आवरण फट गया है; एक छोटी सफेद जड़ नीचे की ओर बढ़ रही है
दिन 4–5मिट्टी के ऊपर हुक जैसा मुड़ा हुआ प्ररोह दिखाई देता है
दिन 7–10प्ररोह सीधा हो जाता है, पहली हरी पत्तियाँ खुलती हैं, जड़ शाखाएँ बनाती है

उसी क्रियाकलाप में दिखने वाली अन्य विशेषताएँ—

  • पोषण— नवोद्भिद पहले बीज में संचित भोजन का उपयोग करता है, फिर हरी पत्तियाँ खुलते ही स्वयं भोजन बनाता है।
  • श्वसन— बीजों को वायु चाहिए थी; इसी कारण गमला ‘ख' असफल रहा। यह श्वसन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
  • उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया— बिना किसी के बताए जड़ नीचे और प्ररोह ऊपर मुड़ा; गमला ‘ग' के पीले नवोद्भिद प्रकाश में आते ही हरे हो गए।
  • मृत्यु— गमला ‘ख' के बीज सड़ गए, और परिस्थितियाँ न मिलने पर पौधा मर जाता है।
यह प्रश्न दोबारा क्यों पूछा गया: क्रियाकलाप 10.1 में आपने पौधे को सजीव अपनी पूर्व-धारणा के आधार पर कहा था। क्रियाकलाप 10.2 के बाद आप वही बात इसलिए कह सकते हैं क्योंकि आपने उसे घटित होते देखा है। यही अभिमत और प्रमाण का अंतर है।
प्र3.
आप बीजों को सजीव या निर्जीव किस श्रेणी में रखेंगे?
उत्तर

सजीव— और अब मैं इसे केवल कहता नहीं, सिद्ध भी कर सकता/सकती हूँ।

जीवन की विशेषताक्या क्रियाकलाप 10.2 में बीज ने दिखाई?
वृद्धिहाँ— वह फूला, जड़ और प्ररोह निकाले, नवोद्भिद बना
श्वसनहाँ— उसे वायु चाहिए थी; वायुरहित बीज (गमला ख) मर गए
पोषणहाँ— पहले भीतर संचित भोजन, फिर स्वयं बनाया भोजन
गतिहाँ— जड़ नीचे और प्ररोह ऊपर की ओर गया
अनुक्रियाहाँ— जल, गुरुत्व और बाद में प्रकाश के प्रति अनुक्रिया की
जननहाँ— बड़ा होकर यही पौधा नए बीज बनाएगा
मृत्युहाँ— जलमग्न गमले के बीज मरकर सड़ गए
सूखे बीज ने हमें धोखा क्यों दिया: प्रसुप्त बीज अपनी जैव क्रियाएँ इतनी धीमी रखता है कि बाहर कुछ दिखाई ही नहीं देता। यह उस दीये जैसा है जिसकी लौ लगभग बुझा दी गई हो— लौ छोटी है, बुझी नहीं। जल और वायु मिलते ही वह फिर भड़क उठती है।
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