कुतूहल अध्याय 11 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 11.9 में प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित वस्तुओं को दर्शाया गया है। उन्हें उनके अव्यवस्थित नामों से मिलाइए। एक अन्य तालिका बनाइए और इन संसाधनों के नाम लिखिए। इन संसाधनों को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के रूप में वर्गीकृत कीजिए। (अव्यवस्थित नाम— नटाट्च, नव, नवप, लज)
उत्तर

चरण 1— अव्यवस्थित नामों को सही कीजिए।

अव्यवस्थित नामसही नाम
नटाट्चचट्टान
नववन
नवपपवन
लजजल

चरण 2— प्रत्येक चित्र को उसके नाम से मिलाइए। चित्र 11.9 की अंतिम पंक्ति में चट्टान का चित्र है, अतः वह नटाट्च से मिलता है। शेष तीन चित्रों को— एक साथ उगे पेड़, वायु से हिलती/घूमती कोई वस्तु, तथा बहता या संचित जल— नव, नवप और लज से मिलाइए।

चरण 3— नई तालिका, वर्गीकरण सहित।

संसाधननवीकरणीय / अनवीकरणीयकारण
चट्टानअनवीकरणीयबनने में हजारों से लाखों वर्ष लगते हैं; एक बार निकाल लेने पर हमारे जीवनकाल में उसकी पूर्ति नहीं होती
वननवीकरणीयबीजों से नए पेड़ उगते हैं और प्रकृति वन को पुनः स्थापित कर देती है— बशर्ते उसे पर्याप्त समय मिले
पवननवीकरणीयवायु निरंतर चलती रहती है; पवनचक्की में उपयोग करने से वह समाप्त नहीं होती
जलनवीकरणीयप्रकृति जल चक्र— वाष्पीकरण, बादल और वर्षा— द्वारा इसका नवीकरण करती रहती है
सावधान: ‘नवीकरणीय’ का अर्थ ‘असीमित’ नहीं है। वन तभी नवीकरणीय है जब उसे इतनी धीमी गति से काटा जाए कि वह पुनः उग सके, और जल तभी, जब हम उसे प्रदूषित न करें और वर्षा से पुनःपूर्ति की तुलना में अधिक भू-जल न खींचें।
प्र2.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य? यदि असत्य है, तो उन्हें सही कर के पुनः लिखिए— (क) प्रकृति में मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। (ख) मशीन प्रकृति में पाया जाने वाला एक संसाधन है। (ग) प्राकृतिक गैस एक अनवीकरणीय संसाधन है। (घ) वायु एक नवीकरणीय संसाधन है।
उत्तर
कथनसत्य / असत्यसही कथन / कारण
(क) प्रकृति में मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।सत्यजीवित रहने के लिए आवश्यक सब कुछ प्रकृति देती है— वायु, जल, धूप, मृदा, भोजन, वन, खनिज और ईंधन। गांधीजी के शब्दों में— “पृथ्वी प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराती है, लेकिन प्रत्येक मनुष्य के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।”
(ख) मशीन प्रकृति में पाया जाने वाला एक संसाधन है।असत्यसही कथन: मशीन एक मानव-निर्मित संसाधन है। इसे मनुष्य खनिज और जीवाश्म ईंधन जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके बनाता है।
(ग) प्राकृतिक गैस एक अनवीकरणीय संसाधन है।सत्ययह एक जीवाश्म ईंधन है। इसे बनने में लाखों वर्ष लगे, यह सीमित मात्रा में है और उचित समयावधि में इसकी पुनःपूर्ति नहीं होती।
(घ) वायु एक नवीकरणीय संसाधन है।सत्यप्रकृति इसका निरंतर नवीकरण करती है— पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं, तथा पवन एवं जल चक्र इसे मिलाते और स्वच्छ करते रहते हैं।
यहाँ क्या परखा जा रहा है: प्रकृति से मिली वस्तु (प्राकृतिक संसाधन) और उससे बनाई गई वस्तु (मानव-निर्मित संसाधन) का अंतर, तथा यह अंतर कि प्रकृति किन संसाधनों को शीघ्र लौटा देती है और किन्हें नहीं।
प्र3.
सबसे उपयुक्त विकल्प का उपयोग करके रिक्त स्थान भरें। 3.1 ईंधन जो सामान्यतः स्कूटर या बाइक जैसे दोपहिया वाहनों में उपयोग किया जाता है...... (क) मिट्टी का तेल (ख) पेट्रोल (ग) डीजल (घ) सी.एन.जी. 3.2 नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है...... (क) कोयला (ख) जल (ग) प्राकृतिक गैस (घ) पेट्रोल
उत्तर

3.1 दोपहिया वाहनों में सामान्यतः उपयोग किया जाने वाला ईंधन है— (ख) पेट्रोल

  • (क) मिट्टी का तेल— लालटेन और स्टोव में जलता है, दोपहिया इंजन में नहीं।
  • (ग) डीजल— ट्रक, बस और ट्रैक्टर में, जिनका इंजन भिन्न प्रकार का होता है।
  • (घ) सी.एन.जी.— कुछ ऑटो, टैक्सी और बसों में उपयोग होती है, दोपहिया वाहनों का सामान्य ईंधन नहीं है।

3.2 नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है— (ख) जल

  • (क) कोयला, (ग) प्राकृतिक गैस और (घ) पेट्रोल (पेट्रोलियम से प्राप्त) तीनों जीवाश्म ईंधन हैं— अनवीकरणीय।
  • जल का नवीकरण प्रकृति जल चक्र द्वारा करती रहती है, अतः यह नवीकरणीय है।
सुझाव: ऐसे प्रश्नों में पहले पूछिए— “क्या यह जीवाश्म ईंधन या खनिज है?” यदि हाँ, तो वह अनवीकरणीय है। वायु, जल, वन, सौर-ऊर्जा और पवन प्रायः नवीकरणीय उत्तर होते हैं।
प्र4.
निम्नलिखित को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के रूप में वर्गीकृत करें— कोयला, प्राकृतिक गैस, वन और खनिज।
उत्तर
संसाधनप्रकारकारण
कोयलाअनवीकरणीयदबे हुए पादप-अवशेषों से लाखों वर्षों में बना जीवाश्म ईंधन; सीमित मात्रा में और एक बार उपयोग के बाद समाप्त
प्राकृतिक गैसअनवीकरणीययह भी जीवाश्म ईंधन है, जो पेट्रोलियम के साथ पृथ्वी के भीतर लाखों वर्षों में बना
वननवीकरणीयबीजों से नए पेड़ उगते हैं, अतः प्रकृति वन को पुनर्स्थापित कर देती है— किंतु तभी जब उसे पर्याप्त समय मिले
खनिजअनवीकरणीयचट्टानों के भीतर अत्यंत लंबे समय में बने; भंडार सीमित हैं और उनकी पुनःपूर्ति नहीं होती
नवीकरणीय: वन
अनवीकरणीय: कोयला, प्राकृतिक गैस, खनिज
प्र5.
हम यह क्यों कहते हैं कि पेट्रोलियम एक अनवीकरणीय संसाधन है?
उत्तर

क्योंकि इसे बनने में लाखों वर्ष लगते हैं, यह सीमित मात्रा में पाया जाता है, और उचित समयावधि के भीतर इसकी पुनःपूर्ति नहीं होती— एक बार उपयोग करने के बाद यह समाप्त हो जाता है।

  • यह कैसे बना: पेट्रोलियम पृथ्वी के भीतर गहराई में दब गये सूक्ष्मजीवों और पौधों के अवशेषों से धीरे-धीरे बना।
  • कितना समय लगा: लाखों वर्ष— कुछ वर्ष या शताब्दियाँ नहीं।
  • कितना उपलब्ध है: यह केवल कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में मिलता है— भारत में मुंबई हाई, गुजरात, असम और राजस्थान के बाड़मेर में।
  • उपयोग के बाद क्या बचता है: पेट्रोल या डीजल जलकर धुँआ और गैसों में बदल जाता है। ऐसा कुछ शेष नहीं रहता जो फिर से पेट्रोलियम बन सके।
लाखों वर्षों में बना → कुछ सौ वर्षों में समाप्त
उचित समय में पुनःपूर्ति नहीं = अनवीकरणीय
वन से तुलना कीजिए: काटे गये पेड़ की जगह बीस-तीस वर्ष में नया पेड़ आ जाता है— यह मनुष्य के जीवनकाल के भीतर है, इसलिए वन नवीकरणीय है। पेट्रोल की टंकी फिर से भरने के लिए कोई दस लाख वर्ष प्रतीक्षा नहीं कर सकता, इसलिए पेट्रोलियम नहीं।
प्र6.
वनों को पुनः उगाना कठिन है। इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर

वन केवल पेड़ों की भीड़ नहीं है— वह पौधों, जंतुओं, मृदा और सूक्ष्मजीवों का ऐसा समुदाय है जो बहुत लंबे समय में बनता है। पेड़ लगाए जा सकते हैं; वन को उगना पड़ता है।

  • पेड़ों में दशकों लगते हैं। साल, सागौन या देवदार को पूरा बड़ा होने में 30 से 60 वर्ष लगते हैं। एक नया वन उगाने या लुप्त हुए वन को पुनर्स्थापित करने में कई वर्ष लग जाते हैं।
  • सबसे पहले मृदा चली जाती है। पेड़ हटते ही जड़ें मृदा को नहीं थामतीं और वर्षा उपजाऊ ऊपरी मृदा बहा ले जाती है। फिर नए पौधों को उगने के लिए दुर्बल मृदा ही मिलती है।
  • झाड़ियाँ और ह्यूमस भी नष्ट हो जाते हैं। सड़ी पत्तियों की जो परत मृदा को समृद्ध करती है, उसे फिर से बनने में वर्षों लगते हैं।
  • जंतु चले जाते हैं। परागण करने वाले और बीज बिखेरने वाले पक्षी, चमगादड़, मधुमक्खियाँ और कीट पलायन कर जाते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से वन का पुनः उगना धीमा पड़ जाता है। अज्जी के गाँव में गिरे हुए फल ही उठाए जाते हैं— ठीक इसीलिए, कि जंतुओं और पक्षियों के मल से निकले बीज नए पेड़ उगाते रहें।
  • पुनर्रोपण में कुछ ही प्रजातियाँ लगती हैं। प्राकृतिक वन में सैकड़ों प्रकार के पौधे होते हैं, जबकि रोपित वन में प्रायः एक-दो; अतः जीवों की विविधता लौटती नहीं।
  • खरपतवार खाली भूमि पर छा जाते हैं और नए पौधों को दबा देते हैं।
सही निष्कर्ष: चूँकि पुनः उगना इतना धीमा है, इसलिए हमें वनों का संरक्षण और दायित्वपूर्ण उपयोग करना चाहिए ताकि उन्हें दोबारा उगने के लिए पर्याप्त समय मिल सके— विद्यमान वन को बचाना नया वन बनाने से कहीं सरल है।
क्या आप जानते हैं? चिपको आंदोलन के पीछे यही विचार था। इसकी शुरुआत 1970 के दशक में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुई। स्थानीय महिलाओं ने पेड़ों को घेरकर और उनसे लिपटकर उन्हें कटने से बचाया— क्योंकि वे जानती थीं कि यह वन उनके जीवनकाल में वापस नहीं आएगा।
प्र7.
पाँच दैनिक गतिविधियों की सूची बनाइए जहाँ आप प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हैं। उनका उपयोग कम करने की विधियाँ सुझाएँ।
उत्तर
दैनिक गतिविधिउपयोग होने वाले प्राकृतिक संसाधनउपयोग कम करने के उपाय
1. दाँत साफ करना और नहानाजलब्रश करते समय एक मग जल लें; शॉवर के स्थान पर बाल्टी से नहाएँ; टपकते नल की सूचना दें
2. विद्यालय जानाजीवाश्म ईंधन— पेट्रोल, डीजल या सी.एन.जी.पास हो तो पैदल या साइकिल से जाएँ; विद्यालय बस लें; पड़ोसियों के साथ वाहन साझा करें
3. भोजन बनाना और खानाप्राकृतिक गैस या लकड़ी, जल, मृदा, धूपढककर प्रेशर कुकर में पकाएँ; उतना ही बनाएँ जितना खाया जाए; भोजन कभी व्यर्थ न करें, क्योंकि व्यर्थ भोजन उसे उगाने में लगे सभी संसाधनों को व्यर्थ कर देता है
4. बल्ब, पंखा और टी.वी. चलानाकोयला (अधिकांश विद्युत कोयले से बनती है)कमरे से निकलते समय बंद करें; एल.ई.डी. बल्ब लगाएँ; दिन में खिड़की खोलकर प्राकृतिक प्रकाश लें; जहाँ संभव हो सौर ऊर्जा अपनाएँ
5. कॉपी-किताब में लिखनावन (कागज), खनिज, पेट्रोलियम (प्लास्टिक)पृष्ठ के दोनों ओर लिखें; पुरानी कॉपियाँ पूरी करें; रीफिल वाली कलम रखें; पुरानी पुस्तकें छोटी कक्षाओं को दें और रद्दी का पुनर्चक्रण कराएँ
हर सुझाव के पीछे एक ही नियम है: कम उपयोग करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें। ‘कम उपयोग’ पहले आता है, क्योंकि जो संसाधन उपयोग ही नहीं हुआ, वह पूरी तरह बच गया।
प्र8.
चार गतिविधियों की सूची बनाइए जो वायु की उपस्थिति में संभव हैं।
उत्तर

चार (और उससे भी अधिक):

  1. श्वसन— हम और लगभग सभी सजीव वायु से ऑक्सीजन लेते हैं; इसके बिना कुछ क्षण भी जीवित नहीं रहा जा सकता।
  2. ईंधन का जलना— गैस चूल्हा, चूल्हा और प्रत्येक वाहन का इंजन ईंधन जलाकर ऊष्मा देने के लिए वायु की ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
  3. पवन से विद्युत उत्पादन— चलती वायु पवनचक्की के पंखों को घुमाती है, जैसे तमिलनाडु के मुप्पंडल और राजस्थान के जैसलमेर पवन पार्क में; यही पवन फिरकी भी घुमाती है।
  4. गीले कपड़ों और अनाज का सूखना— चलती वायु जलवाष्प को उड़ा ले जाती है, इसलिए हवा वाले दिन कपड़े शीघ्र सूखते हैं।

अन्य सही उत्तर:

  • पतंग उड़ाना, तथा पक्षियों और वायुयानों का उड़ना।
  • पवन से नाव चलाना, और अनाज ओसाकर भूसा अलग करना।
  • बोलना और सुनना— ध्वनि वायु से होकर चलती है।
  • पवन द्वारा परागण तथा बीजों का बिखराव।
ऐसी गतिविधियाँ कैसे पहचानें: स्वयं से पूछिए— “यदि वायु बिल्कुल न हो तो क्या यह काम फिर भी होगा?” यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो वह कार्य वायु ही कर रही है।
प्र9.
आप अपने घर के आस-पास को हरित आवरण से समृद्ध बनाने के लिए किस प्रकार योगदान देंगे? ऐसे कार्यों की सूची बनाएँ।
उत्तर

मैं ये कार्य कर सकता/सकती हूँ (उस क्रम में जो कक्षा 6 का विद्यार्थी वास्तव में कर सकता है):

  1. पौधे लगाना— घर, विद्यालय और मोहल्ले की सड़क के किनारे; और सजावटी के स्थान पर स्थानीय पेड़ चुनना— नीम, पीपल, बरगद, गुलमोहर, आँवला, जामुन, आम और सहजन।
  2. केवल लगाना नहीं, सँभालना भी— प्रत्येक पौधे को पानी देना, चारों ओर ट्री-गार्ड लगाना और जड़ के पास सूखी पत्तियाँ बिछाना। जो पौधा सूख गया, वह हरित आवरण नहीं है।
  3. एक पेड़ गोद लेना— कक्षा का प्रत्येक विद्यार्थी पूरे वर्ष एक पेड़ की जिम्मेदारी ले और उसकी वृद्धि का रिकॉर्ड रखे।
  4. रसोई-बगिया बनाना— बालकनी या छत पर गमलों में तुलसी, करी पत्ता, पुदीना, मिर्च और टमाटर।
  5. खाद बनाना— रसोई और बगीचे के कचरे से कंपोस्ट बनाकर उर्वरक के स्थान पर उसका उपयोग करना।
  6. वन महोत्सव मनाना— जुलाई में देश भर में मनाया जाने वाला यह सप्ताह भर का वन-उत्सव विद्यालय में शिक्षक के साथ आयोजित करना।
  7. जो पहले से है उसकी रक्षा करना— टहनियाँ न तोड़ना, तनों पर नाम न खोदना, बिना अनुमति पेड़ काटने वाले की सूचना देना, मोहल्ले के पुराने पेड़ बचाना।
  8. जागरूकता फैलाना— पोस्टर, दीवार पत्रिका, नुक्कड़ नाटक, और जन्मदिन पर प्लास्टिक उपहार के स्थान पर पौधे भेंट करना।
  9. विद्यालय के इकोक्लब से जुड़ना और यह सरल सर्वेक्षण रखना कि आपकी गली में कितने पेड़ हैं, ताकि वृद्धि मापी जा सके।
हरित आवरण क्यों आवश्यक है: पेड़ छाया और ऑक्सीजन देते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं, जड़ों से मृदा थामते हैं, वर्षा लाने में सहायक होते हैं और पक्षियों तथा कीटों का घर हैं। हरित आवरण बढ़ाना ही वन महोत्सव का उद्देश्य है।
प्र10.
दिए गये चित्र में हम देखते हैं कि भोजन बनाया जा रहा है। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए— (क) भोजन बनाने के लिए किस प्रकार की ऊर्जा का उपयोग हो रहा है? (ख) भोजन बनाने के लिए इस प्रकार की ऊर्जा के उपयोग का एक लाभ और एक हानि लिखिए।
उत्तर

चित्र में एक गाँव की झोपड़ी के बाहर आकाश की ओर मुँह किए एक बड़ी चमकीली तश्तरी है और उसके सामने एक बर्तन रखा है— यह सोलर कुकर (तश्तरी वाला सौर कुकर) है।

(क) यहाँ सौर-ऊर्जा अर्थात् सूर्य की ऊष्मा और प्रकाश का उपयोग हो रहा है। तश्तरी सूर्य की किरणों को एकत्र करके बर्तन पर केंद्रित कर देती है, जिससे बर्तन इतना गर्म हो जाता है कि भोजन पक जाए। इसमें कोई ईंधन नहीं जलता।

(ख) एक लाभ और एक हानि

लाभहानि
यह निःशुल्क और स्वच्छ है— लकड़ी, कोयला या एल.पी.जी. की आवश्यकता नहीं, अतः न धुँआ, न वायु प्रदूषण, और एक अनवीकरणीय ईंधन की बचत भीयह केवल तेज धूप में काम करता है— बादल वाले दिन, वर्षा में या सूर्यास्त के बाद खाना नहीं बन सकता, और गैस चूल्हे की तुलना में धीमा है

अन्य लाभ: ईंधन का खर्च नहीं, आग या गैस रिसाव का भय नहीं, भोजन जलता नहीं और उसके पोषक तत्व बचे रहते हैं।
अन्य हानियाँ: कुकर महँगा है, खुली जगह चाहिए, हर घंटे उसे सूर्य की ओर घुमाना पड़ता है, और इसमें तलना या रोटी सेंकना कठिन है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: सौर-ऊर्जा नवीकरणीय है— सूर्य इसे निरंतर देता रहता है। सोलर कुकर में पका हर भोजन उतनी एल.पी.जी. या लकड़ी बचाता है। इस प्रकार यह एक उपकरण अध्याय के तीन विचारों को जोड़ देता है— सूर्य से ऊर्जा, जीवाश्म ईंधन का संरक्षण और वायु प्रदूषण में कमी।
प्र11.
बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटने से मृदा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। आपके अनुसार ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि मृदा को यथास्थान थामकर रखने और उपजाऊ बनाए रखने का काम पेड़ ही करते हैं। उन्हें हटा दीजिए तो मृदा चार अलग-अलग प्रकार से क्षतिग्रस्त होती है।

  1. मृदा बह जाती है (अपरदन)। पौधों की जड़ें मृदा को जकड़कर रखती हैं और उसे बहने से रोकती हैं। जड़ें न रहने पर वर्षा का जल उपजाऊ ऊपरी मृदा को नदियों में बहा ले जाता है और पवन सूखी सतह उड़ा ले जाती है।
  2. मृदा के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। पेड़ों से गिरने वाली पत्तियाँ सड़कर मृदा को पोषक तत्वों से समृद्ध करती हैं, जिनका उपयोग नए पौधे करते हैं। पेड़ नहीं तो पत्तियाँ नहीं, पत्तियाँ नहीं तो मृदा प्रतिवर्ष और निर्धन होती जाती है।
  3. मृदा सूखकर कठोर हो जाती है। पेड़ों की छाया हटते ही सूर्य सीधे भूमि पर पड़ता है; नमी वाष्पित हो जाती है और मृदा पककर कठोर हो जाती है तथा उसमें दरारें पड़ जाती हैं।
  4. मृदा के भीतर का जीवन समाप्त हो जाता है। केंचुए— जो मृदा को उलटने-पलटने और ढीला करने वाले प्राकृतिक कारक हैं— तथा कीट और सूक्ष्मजीव नमी और सड़ी पत्तियों पर निर्भर हैं। उनके बिना मृदा का पलटना और मिलना रुक जाता है।
पेड़ नहीं → जड़ें नहीं → ऊपरी उपजाऊ मृदा बह जाती है
पत्तियाँ नहीं गिरतीं → ह्यूमस नहीं बनता → पोषक तत्व घटते हैं
छाया नहीं → मृदा सूखकर कठोरबंजर भूमि
इसकी भरपाई शीघ्र क्यों नहीं होती: मृदा का निर्माण चट्टानों के विघटन से हजारों वर्षों में होता है। जो मृदा एक वर्षा-ऋतु में बह जाती है, वह किसी के जीवनकाल में वापस नहीं बनती— इसीलिए मृदा को अनवीकरणीय संसाधनों में गिना जाता है।
प्र12.
दो मानवीय गतिविधियाँ बताइए जिनसे वायु प्रदूषित होती है। एक कार्य सुझाएँ जो वायु प्रदूषण कम करने में सहायक हो।
उत्तर

वायु को प्रदूषित करने वाली दो मानवीय गतिविधियाँ:

  1. वाहनों में जीवाश्म ईंधन जलाना। इंजन में पेट्रोल और डीजल जलने पर धुँआ और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है। परिवहन के लिए जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण हुआ है— यही गंध भूमि और सूर्या को नगर पहुँचते ही मिलती है।
  2. कारखानों तथा बिजलीघरों में ईंधन जलाना और कचरा जलाना। विद्युत उत्पादन के लिए जलाया गया कोयला तथा ईंट-भट्ठों, चिमनियों, कूड़े और पराली के धुएँ से वायु में कालिख, राख और हानिकारक गैसें भर जाती हैं। कोयले, लकड़ी और उपलों पर खाना बनाने से घर के भीतर की वायु भी प्रदूषित होती है।

अन्य कारण: निर्माण, खनन और उत्खनन की धूल; रासायनिक धुआँ और कीटनाशकों का छिड़काव; प्लास्टिक कचरे का जलाया जाना।

वायु प्रदूषण कम करने का एक कार्य:

प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग वाहन के स्थान पर सार्वजनिक वाहन का उपयोग करें, अथवा पास की दूरी पैदल या साइकिल से तय करें।

एक बस उतने ही लोगों को ले जाती है जितने चालीस स्कूटर, अतः प्रति व्यक्ति धुँआ बहुत कम होता है। अन्य अच्छे कार्य: सी.एन.जी. या विद्युत वाहन अपनाना, घर में कोयले-उपलों के स्थान पर एल.पी.जी. या सोलर कुकर का उपयोग, लाल बत्ती पर इंजन बंद करना, और अधिक पेड़ लगाना जो कार्बन डाइऑक्साइड सोखते और धूल रोकते हैं।

स्वच्छ वायु इतनी आवश्यक क्यों है: प्रदूषित वायु में साँस सभी लेते हैं— बच्चे, बुजुर्ग और पशु भी। प्रदूषित तालाब से तो दूर हटा जा सकता है, प्रदूषित वायु से नहीं।
प्र13.
एक परिवार सौर पैनल बिजली उत्पादन के लिए, गैस स्टोव खाना बनाने के लिए और पवनचक्की कुएँ से पानी खींचने के लिए उपयोग करता है। क्या होगा यदि एक सप्ताह तक सूर्य का प्रकाश न हो।
उत्तर

तीनों साधनों को अलग-अलग देखिए।

साधनउस सप्ताह क्या होगाक्यों
सौर पैनललगभग पूरी तरह काम करना बंद कर देंगेसौर पैनल सूर्य की ऊर्जा एकत्रित करके विद्युत बनाते हैं। सूर्य का प्रकाश ही न हो तो एकत्र करने को कुछ नहीं— बल्ब, पंखा और टी.वी. नहीं चलेंगे, और बैटरी में संचित विद्युत एक-दो दिन में समाप्त हो जाएगी।
गैस स्टोवसामान्य रूप से चलता रहेगायह प्राकृतिक गैस या एल.पी.जी. जलाता है, जो पहले से सिलिंडर या पाइपलाइन में है। इसे सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता नहीं, अतः खाना बनता रहेगा।
पवनचक्कीजब तक पवन चलती रहेगी, काम करती रहेगीइसे पवन घुमाती है, सूर्य का प्रकाश नहीं; अतः कुएँ से पानी खींचा जा सकेगा।

घर के अन्य कामों पर भी असर पड़ेगा: कपड़े नहीं सूखेंगे, मिर्च और अन्य वस्तुएँ धूप में नहीं सुखाई जा सकेंगी, सौर जल ऊष्मक गर्म जल नहीं देगा, पौधे ठीक से नहीं बढ़ेंगे, और दिन अँधेरे तथा ठंडे रहेंगे।

एक गहरी बात, जिसे उत्तर में लिखना अच्छा रहेगा: पवन स्वयं इसलिए बनती है क्योंकि सूर्य पृथ्वी के भिन्न-भिन्न भागों को असमान रूप से गर्म करता है। अतः यदि सूर्य बहुत लंबे समय तक छिपा रहे तो पवन भी दुर्बल पड़ जाएगी— और तब तीन में से दो साधनों के पीछे सूर्य ही निकलेगा, एक के नहीं। इसीलिए सूर्य को पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत कहा जाता है।
परीक्षा के लिए सुझाव: उत्तर साधन-दर-साधन लिखिए— स्पष्ट कहिए कि कौन-सा बंद होगा, कौन-से दो चलते रहेंगे, और प्रत्येक का कारण दीजिए। प्रश्न यही देखना चाहता है।
प्र14.
निम्नलिखित शब्दों का उपयोग करके रिक्त स्थानों की पूर्ति करें— (जीवाश्म ईंधन, वन, वायु, पेट्रोलियम, कोयला, जल और अनवीकरणीय संसाधन)
उत्तर

पूरा किया हुआ चार्ट:

प्राकृतिक संसाधन अनवीकरणीय संसाधन नवीकरणीय संसाधन जीवाश्म ईंधन कोयला प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम वायु जल वन
प्राकृतिक संसाधनों का अनवीकरणीय और नवीकरणीय में वर्गीकरण। ‘प्राकृतिक गैस’ चार्ट में पहले से छपी थी; शेष सात रिक्त स्थान भरे गये हैं।
चार्ट में स्थानउत्तर
“प्राकृतिक संसाधन” के नीचे बायाँ वृत्तअनवीकरणीय संसाधन
उसके नीचे का बॉक्सजीवाश्म ईंधन
सबसे नीचे बाईं पंक्ति का पहला बॉक्सकोयला
सबसे नीचे बाईं पंक्ति का तीसरा बॉक्सपेट्रोलियम
“नवीकरणीय संसाधन” के नीचे तीनों बॉक्सवायु, जल, वन
निश्चित कैसे हों: नीचे की पंक्ति के बीच वाले बॉक्स में “प्राकृतिक गैस” पहले से छपी है, और कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस— ये ठीक तीन जीवाश्म ईंधन हैं। अतः वही पूरी शाखा अनवीकरणीय होगी, और शेष तीन शब्द— वायु, जल और वन— वही हैं जो अध्याय में नवीकरणीय के उदाहरण के रूप में दिए गये हैं।
प्र15.
उद्योगों और आवास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेड़ों की माँग बढ़ रही है। इसलिए लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। क्या यह उचित है? चर्चा कीजिए और एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर

पक्ष: माँग वास्तविक है, किंतु उसे पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक वनों को काटना उचित नहीं है। यही आवश्यकता ऐसे उपायों से भी पूरी की जा सकती है जो वनों को नष्ट न करें।

नमूना रिपोर्टक्या उद्योग और आवास की माँग पूरी करने के लिए पेड़ काटना उचित है?

1. माँग सचमुच है। फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियाँ और मचान के लिए लकड़ी चाहिए; पुस्तकों और पैकिंग के लिए कागज चाहिए; परिवार बढ़ने पर घरों के लिए भूमि चाहिए। लाखों लोगों की आजीविका भी इन्हीं उद्योगों से चलती है।

2. बड़े पैमाने पर कटाई से हम क्या खोते हैं। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण वन क्षेत्र लगातार घट रहा है। वन नष्ट होने पर— उपजाऊ ऊपरी मृदा बह जाती है, भूमि बंजर हो जाती है, कुएँ सूखते हैं जबकि बाढ़ बढ़ती है, वन्य जंतु और पक्षी भोजन तथा आश्रय खो देते हैं, वायु में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती और ऑक्सीजन घटती है, और वनवासी परिवारों की आजीविका छिन जाती है। एक नया वन उगाने या लुप्त हुए वन को पुनर्स्थापित करने में कई वर्ष लग जाते हैं— यह क्षति हमारे जीवनकाल में पूरी नहीं होती।

3. अतः मेरा निष्कर्ष। योजनाबद्ध ढंग से कुछ पेड़ काटना और उनसे अधिक पेड़ पुनः लगाना स्वीकार्य है। प्राकृतिक वन को साफ कर देना नहीं— इसमें हम एक अपूरणीय वस्तु देकर वह पा रहे हैं जो किसी और उपाय से भी मिल सकती थी।

4. इसके स्थान पर क्या किया जाए।

  • लकड़ी को फसल की तरह उगाइए— सामाजिक वानिकी और कृषि-वानिकी: खेतों की मेड़ों और बंजर भूमि पर यूकेलिप्टस, पॉपुलर, बाँस और सरू; प्राकृतिक वन काटने के स्थान पर।
  • बाँस का उपयोग कीजिए, जो तीन-चार वर्ष में फिर तैयार हो जाता है; तथा लकड़ी के बुरादे से बना बोर्ड।
  • कागज का पुनर्चक्रण कीजिए और दोनों ओर छपाई कीजिए; एक टन पुनर्चक्रित कागज अनेक पेड़ बचाता है।
  • जहाँ लकड़ी अनिवार्य न हो वहाँ ईंट, पत्थर, इस्पात और सीमेंट से निर्माण कीजिए; पुराने फर्नीचर की मरम्मत और पुनः उपयोग कीजिए।
  • प्रत्येक काटे गये पेड़ के बदले कम से कम पाँच पौधे लगाइए और जब तक वे जम न जाएँ, उनकी देखभाल कीजिए।
  • वन महोत्सव में भाग लीजिए, पवित्र उपवनों की रक्षा कीजिए, और 1970 के दशक के उत्तराखंड के चिपको आंदोलन से प्रेरणा लीजिए, जहाँ महिलाओं ने पेड़ों से लिपटकर उन्हें बचाया।

5. एक पंक्ति में। हमें वनों का संरक्षण और दायित्वपूर्ण उपयोग करना चाहिए ताकि उन्हें पुनः उगने का पर्याप्त समय मिले— आज की आवश्यकता पूरी हो, किंतु कल का हिस्सा न छिने।

कक्षा में यह तर्क कैसे रखें: केवल यह मत कहिए कि “पेड़ काटना बुरा है”। पहले मानिए कि माँग है, फिर उसे पूरा करने का बेहतर उपाय बताइए। इसी से रिपोर्ट प्रभावशाली बनती है।
प्र16.
अपने विद्यालय में पानी के उपयोग को कम करने के लिए एक योजना बनाइए। इस योजना को साकार करने के लिए आप क्या कदम उठाएँगे और इससे पर्यावरण को कैसे सहायता मिलेगी?
उत्तर
नमूना योजना: “हर बूँद बचाएँ”— हमारे विद्यालय की जल योजना

चरण 1— पता लगाइए कि जल कहाँ उपयोग और कहाँ व्यर्थ होता है (पहला सप्ताह)। प्रत्येक कक्षा से दो विद्यार्थियों का जल-मंडल बनाइए। एक जाँच-सूची लेकर पूरे विद्यालय में घूमिए और हर नल, कूलर, टंकी और शौचालय नोट कीजिए। गिनिए कि कितने नल टपकते हैं, कितने पूरी तरह बंद नहीं होते, और टंकी बहती है या नहीं। विद्यालय का सरल नक्शा बनाकर हर जल-स्थान अंकित कीजिए।

चरण 2— जो खराब है उसे ठीक कराइए (दूसरा सप्ताह)। सूची प्रधानाचार्य को दीजिए। टपकते नलों के वाशर बदलवाइए, टूटे पाइप ठीक कराइए और टंकी में फ्लोट वाल्व लगवाइए ताकि वह स्वयं बहना बंद कर दे।

चरण 3— जल उपयोग करने का ढंग बदलिए (तीसरे सप्ताह से)।

  • हर नल के ऊपर एक छोटा-सा चित्रित बोर्ड— “उपयोग के बाद मुझे बंद कीजिए।”
  • वॉश-बेसिन पर पुश-टैप लगवाइए या मुख्य वाल्व आधा खोलिए ताकि जल की धार कम रहे।
  • हाथ धोने और आर.ओ. से निकले जल के लिए एक ड्रम रखिए और उससे फर्श तथा आँगन साफ कीजिए।
  • विद्यालय के बगीचे को सुबह-सुबह पाइप के बजाय झारी से सींचिए और पौधों के चारों ओर सूखी पत्तियाँ बिछाइए।
  • प्रत्येक कक्षा घर से जल की बोतल लाए, ताकि कूलर पर कम जल निकाला और गिराया जाए।

चरण 4— जल लौटाइए (इसी वर्षा-ऋतु में)। विद्यालय की छत का वर्षा जल पाइप द्वारा एक संग्रह टंकी और खेल के मैदान के पास बने रिचार्ज गड्ढे तक ले जाइए। कुछ भूमि बिना पक्की छोड़िए ताकि वर्षा भूमि में समा सके।

चरण 5— मापिए और बताइए (हर महीने)। प्रत्येक माह मीटर की रीडिंग या टैंकरों की संख्या नोट कीजिए और सूचना-पट्ट पर आलेख लगाइए। सबसे अधिक जल बचाने वाली कक्षा को हर माह “नीला तारा” दीजिए।

चरण 6— आगे फैलाइए। प्रार्थना-सभा में घोषणा, पोस्टर, 22 मार्च (विश्व जल दिवस) पर नुक्कड़ नाटक, और घर के लिए पत्र, ताकि परिवार भी यही नियम अपनाएँ।

इससे पर्यावरण को कैसे सहायता मिलेगी:

  • नलकूप या नगरपालिका से कम जल लेने का अर्थ है कम भू-जल खींचा जाना, जिससे भू-जल स्तर धीमी गति से गिरेगा।
  • वर्षा जल संचयन से वर्षा नाली में बहने के बजाय भूमि को पुनः भरती है।
  • जल पंप करने में विद्युत लगती है, जिसका अधिकांश भाग कोयले से बनता है— अतः जल बचाने से कोयला भी बचता है और वायु प्रदूषण घटता है।
  • नदियों और तालाबों में किसानों, पशुओं तथा मछलियों के लिए अधिक जल शेष रहेगा।
  • विद्यार्थी यह आदत घर ले जाएँगे, जिससे बचत पूरे मोहल्ले में कई गुना हो जाएगी।
योजना में चरण और आँकड़े क्यों आवश्यक हैं: “हम जल बचाएँगे” केवल एक इच्छा है। “हमने 11 टपकते नल ठीक कराए और महीने का एक टैंकर घटाया” वह योजना है जिसे जाँचा जा सकता है— और यही वास्तव में काम करती है।
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