भारत के हर क्षेत्र ने अपनी वर्षा, मृदा और ढलान के अनुसार अपनी विधि विकसित की। इस तालिका में अपने राज्य की विधि खोजिए और फिर किसी बुजुर्ग से उसके बारे में पूछिए।
| विधि | राज्य / क्षेत्र | कार्य करने का ढंग |
|---|---|---|
| बावड़ी / बावली | राजस्थान | सीढ़ीदार गहरा कुआँ; वर्षा जल के साथ पास की झीलों, तालाबों और नदियों से रिसने वाला जल भी संचित— तूरजी का झालरा, जोधपुर (चित्र 11.4 ख); चाँद बावड़ी, आभानेरी |
| वाव | गुजरात | सीढ़ीदार बावड़ी— पाटन की रानी की वाव (विश्व धरोहर) और अडालज की वाव |
| टाँका और कुंड | पश्चिमी राजस्थान | आँगन के नीचे भूमिगत टाँका, जिसमें ढलवाँ सतह से वर्षा जल आता है; पेयजल ठंडा बना रहता है |
| जोहड़ और खड़ीन | राजस्थान (अलवर, जैसलमेर) | ढलान पर मिट्टी का बाँध; खेत में बहते जल को बुवाई तक रोकने वाला मेड़-बंधा |
| विरदा | कच्छ, गुजरात | निचली भूमि में उथले कुएँ, जहाँ मीठा वर्षा जल खारे जल के ऊपर तैरता रहता है |
| आहर–पइन | बिहार (मगध) | पइन नालियाँ जल को तीन ओर से बँधे आहर जलाशय तक पहुँचाती हैं |
| एरी (तालाब) | तमिलनाडु | गाँव के तालाबों की शृंखला; एक का अतिरिक्त जल दूसरे को भरता है, अतः वर्षा व्यर्थ नहीं जाती |
| केरे, कल्याणी, पुष्करिणी | कर्नाटक | गाँव के तालाब तथा सीढ़ीदार मंदिर-कुंड |
| फड़ और बंधारा | महाराष्ट्र (नासिक, धुले) | नाले पर पत्थर का बंधारा जल को नहरों द्वारा खेतों के खंडों तक पहुँचाता है |
| हवेली पद्धति | मध्य प्रदेश (बुंदेलखंड) | पूरे वर्षा-काल में छोटी मेड़ों द्वारा वर्षा जल खेत में ही रोका जाता है |
| कटास, मुंडा, बंधा | ओडिशा, झारखंड | ढलान के ऊपरी भाग में मिट्टी के तालाब, जिनसे नीचे के खेतों की सिंचाई होती है |
| कुहल / कूल, नौला, गूल | हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तराखंड | हिमनद के नाले से निकली पत्थर की छोटी नहरें; नौला स्रोत पर बना सीढ़ीदार कुंड है |
| जिंग | लद्दाख | दिन में पिघले हिमनद-जल को एकत्र करने वाला टाँका, जिसका उपयोग शाम को होता है |
| बाँस टपक सिंचाई | मेघालय | चीरे हुए बाँस की नलियाँ झरने का जल बूँद-बूँद करके पान और काली मिर्च के पौधों तक पहुँचाती हैं |
| जाबो (रूजा) | नागालैंड | पहाड़ी की चोटी पर वर्षा जल रोककर, पशु-बाड़े से होते हुए सीढ़ीदार खेतों और मछली-तालाबों तक |
| सुरंगम | केरल, कासरगोड | लेटराइट पहाड़ी में खोदी गई सुरंग, जो चट्टान से रिसने वाला जल एकत्र करती है |
| चेरुवु, कुंटा | तेलंगाना, आंध्र प्रदेश | गाँव के तालाब और छोटे पोखर, जिन्हें मिशन काकतीय के अंतर्गत पुनर्जीवित किया गया |
परियोजना कैसे प्रस्तुत करें: कोई एक विधि चुनिए, उसका नामांकित रेखाचित्र बनाइए, और लिखिए कि वह कहाँ उपयोग होती है, कैसे बनती है, उसकी देखभाल कौन करता है, और आज भी काम करती है या नहीं। यदि आपके पास ऐसी कोई संरचना हो तो उसका चित्र भी लगाइए।