प्र1.
जल को प्रदूषित करने वाली मानवीय गतिविधियों को पहचानिए। कक्षा में अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आप जल प्रदूषण को कम करने के लिए क्या उपाय कर सकते हैं।
उत्तर
पुस्तक में दो बातें बताई गई हैं— जल स्रोतों में कचरा फेंकना और घरों तथा उद्योगों का अपशिष्ट उनमें डालना। शेष गतिविधियाँ ये हैं।
| मानवीय गतिविधि | यह जल को कैसे प्रदूषित करती है |
|---|---|
| बिना शोधन किए मल-जल और नालियों का पानी नदियों में छोड़ना | गंदगी और रोगाणु मिल जाते हैं; जल से दुर्गंध आने लगती है और मछलियाँ मर जाती हैं |
| कारखानों का अपशिष्ट— रंग, अम्ल, तेल, रसायन | ऐसे हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं जो स्वयं समाप्त नहीं होते |
| खेतों में अधिक उर्वरक और कीटनाशक डालना | वर्षा उन्हें बहाकर तालाबों और नदियों में ले जाती है |
| तालाब-नदी में कपड़े, पशु और वाहन धोना | साबुन, अपमार्जक और चिकनाई जल में मिल जाते हैं |
| नदियों में प्लास्टिक थैलियाँ, रैपर, मूर्तियाँ और पूजा-सामग्री डालना | प्लास्टिक वर्षों तक तैरता रहता है और प्रवाह रोकता है |
| जल स्रोत के पास खुले में शौच | रोगाणु जल में मिलकर बीमारियाँ फैलाते हैं |
| नावों और जहाजों से तेल का रिसाव | तेल की पतली परत फैलकर जलीय पौधों और मछलियों को मार देती है |
हम क्या कर सकते हैं (कक्षा में चर्चा कर चुनिए):
- तालाब, नहर या नदी में रैपर, बोतल या बचा भोजन कभी न फेंकें— उन्हें कूड़ेदान तक ले जाएँ।
- अपमार्जक कम मात्रा में उपयोग करें और कपड़े नदी-किनारे के बजाय घर पर धोएँ।
- मूर्तियाँ और पूजा के फूल नदी के स्थान पर अलग बने कुंड में विसर्जित करें।
- विद्यालय और मोहल्ले की नालियाँ साफ और खुली रखें।
- स्वच्छता सप्ताह में पोस्टर और नुक्कड़ नाटक करें; नदी या झील की सफाई अभियान में भाग लें।
यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है: प्रदूषित जल किसी भी सजीव के उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं होता— न हमारे लिए, न पशुओं के लिए, न उसमें रहने वाली मछलियों के लिए। और मृदु जल के स्रोत तो पहले से ही सीमित हैं।