प्र1.
क्या आप प्रकृति की ऐसी कुछ और संपदाओं के विषय में सोच सकते हैं?
उत्तर
अज्जी ने चार संपदाएँ पहले ही बता दी हैं— शुद्ध वायु, उपजाऊ मृदा, पर्याप्त धूप और वृक्ष जो जंतुओं तथा पक्षियों को भोजन एवं आश्रय देते हैं। इनके अतिरिक्त और भी अनेक संपदाएँ हैं— और इनमें से एक भी हमारी बनाई हुई नहीं है।
| प्रकृति की संपदा | यह संपदा क्यों है |
|---|---|
| जल | झरने, नदियाँ, तालाब, वर्षा और भू-जल— पीने, खाना बनाने, नहाने और फसलें उगाने के लिए |
| वन | लकड़ी, फल, शहद, गोंद, औषधियाँ, तथा पक्षियों, कीटों और वन्य जंतुओं का घर |
| मृदा | जड़ों को थामती है, जल एवं पोषक तत्व संचित रखती है और हमारा संपूर्ण भोजन उगाती है |
| पवन | अनाज ओसाने, नाव चलाने, पवनचक्की घुमाने और विद्युत उत्पादन में |
| चट्टानें और खनिज | घर एवं सड़क के लिए पत्थर; खनिजों से लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम और सोना |
| पौधे और जंतु | भोजन, दूध, कपास, ऊन, शहद, लकड़ी और औषधियाँ |
| जीवाश्म ईंधन | पृथ्वी के भीतर गहराई में दबे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस |
इन्हें ‘संपदा’ क्यों कहा गया: संपदा वह मूल्यवान वस्तु है जो हमें बिना कमाए मिली है, किंतु जिसकी रक्षा करना हमारा दायित्व है। वायु, मृदा या नदी किसी कारखाने में नहीं बनतीं। धन के विपरीत, ये यदि बिगड़ जाएँ या समाप्त हो जाएँ तो कोई दुकान हमें दूसरी नहीं दे सकती।
यह कीजिए: अपने घर के बाहर पाँच मिनट खड़े होकर ऐसी दस वस्तुएँ लिखिए जिन्हें किसी मनुष्य ने नहीं बनाया— धूप, बयार, पक्षियों की चहचहाहट, नीम का पेड़, बादल, मृदा, चींटियाँ… यही आपकी अपनी ‘प्रकृति की संपदा’ की सूची है।