प्र1.
क्या सभी चमकदार वस्तुएँ धातु होती हैं?
उत्तर
नहीं। पुरानी कहावत है — “हर चमकती हुई वस्तु सोना नहीं होती!”
- कुछ सामग्रियों की सतहों को पॉलिश करके चमकदार बनाया जाता है, तो कुछ को प्लास्टिक, मोम, लाख या रंग की पतली परतों से लेपित किया जाता है। पॉलिश की हुई लकड़ी की मेज, लैमिनेट की हुई नोटबुक का आवरण, चमकती रेशमी साड़ी, चिकना कुल्हड़ और ग्रेनाइट का फर्श — सब चमकते हैं, पर इनमें से कोई धातु नहीं है।
- कुछ अधातु प्राकृतिक वस्तुएँ भी चमकती हैं — हीरा, अभ्रक का टुकड़ा, सीप के भीतर की परत।
और इसका उल्टा भी सत्य है: धातु मलिन भी दिख सकती है। हवा और नमी के प्रभाव से कई धातुएँ अपनी चमक खो देती हैं, इसलिए पुराना लोहे का फाटक या ताँबे का बर्तन द्युतिहीन दिखता है। इसीलिए हम प्राय: केवल उनकी ताजी कटी हुई सतहों पर ही चमक देखते हैं।
तो निश्चित कैसे हों: केवल चमक से सिद्ध नहीं होता कि सामग्री धातु है। सतह को खरोंचिए या काटिए — धातु भीतर तक चमकदार होती है, जबकि लेप हटते ही नीचे की मलिन लकड़ी, कागज या प्लास्टिक दिख जाती है।
क्या आप जानते हैं? मलिन पड़ चुका पीतल का लोटा इमली या नींबू और राख से रगड़ने पर फिर चमक उठता है। आप वास्तव में हवा और नमी से बनी मलिन परत हटाकर नीचे की ताजी धातु उजागर कर रहे होते हैं।