प्र1.
क्या आपने कभी बाढ़ देखी है अथवा इसके विषय में पढ़ा है? भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए। समूह में चर्चा कीजिए कि बताए गए राज्यों में बाढ़ क्यों आती है?
उत्तर
अध्याय में जिन राज्यों के नाम हैं वे हैं — असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल और आंध्र प्रदेश। भौतिक मानचित्र इस सूची के सामने रखिए और कारण स्वयं दिखने लगता है : इनमें से हर राज्य या तो विशाल नदी-मैदान है या भारी वर्षा वाला तट — या दोनों।
| राज्य | भौतिक मानचित्र क्या दिखाता है | बाढ़ क्यों आती है |
|---|---|---|
| असम | पहाड़ियों से घिरी ब्रह्मपुत्र घाटी, हिमालयी हिम-जल से भरी; पूर्वोत्तर में अत्यधिक भारी मानसूनी वर्षा | संकरी और लगभग समतल घाटी में जल की विशाल मात्रा, फैलने को स्थान नहीं; नदी बहुत गाद लाती है, जिससे तल ऊपर उठ जाता है |
| बिहार | उत्तरी गंगा मैदान, जिसे नेपाल से उतरती कोसी, गंडक और घाघरा काटती हैं | नदियाँ तीखे पर्वतों से समतल मैदान पर उतरकर गति खोती हैं, गाद जमा करती हैं और किनारे तोड़ देती हैं। मार्ग बदलने के कारण कोसी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है |
| उत्तर प्रदेश | गंगा-यमुना का अत्यंत समतल और सघन बसा मैदान | ढाल इतना हल्का कि जल धीरे-धीरे निकलता है; ऊपरी क्षेत्रों की भारी वर्षा एक साथ आ पहुँचती है |
| केरल | संकरी तटीय पट्टी और ठीक पीछे पश्चिमी घाट; उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु | घाट दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारी वर्षा निचोड़ते हैं, और छोटी तीव्र ढाल वाली नदियाँ कुछ ही घंटों में समुद्र तक पहुँच जाती हैं |
| आंध्र प्रदेश | पूर्वी तट पर कृष्णा और गोदावरी के डेल्टा | नीची, समतल डेल्टा भूमि और साथ ही पूर्वी तट पर नियमित आने वाले चक्रवात, जो मूसलाधार वर्षा और समुद्री उभार दोनों लाते हैं |
अध्याय दो और प्रकार की बाढ़ जोड़ता है :
- हिमनदीय झीलों की बाढ़ — हिमालयी क्षेत्रों में। ये झीलें चट्टानों और हिम का अवरोध बनाकर जल रोकती हैं। यदि हिमनद बहुत तेजी से पिघलें या बहुत अधिक वर्षा हो, तो दबाव से जल अवरोध तोड़ देता है — इसे हिमनदीय विस्फोट कहते हैं, जो लोगों और संपत्ति के लिए विनाशकारी होता है।
- नगरीय बाढ़ — भारी वर्षा में शहर डूब जाते हैं, क्योंकि जल निकासी व्यवस्था पर अत्यधिक बोझ होता है, अनियोजित निर्माण जलमार्गों पर अतिक्रमण कर लेता है, और कंक्रीट या डामर की सतहें जल को भूमि में सोखने नहीं देतीं।
उत्तर सदैव कारणों के मेल का क्यों होता है: बाढ़ के लिए दो बातें चाहिए — बहुत अधिक जल, और उसके जाने के लिए कोई स्थान न होना। खाली, तीखी, चट्टानी घाटी में उतनी ही वर्षा केवल तेज धार बनाती है, आपदा नहीं। वही वर्षा समतल, गाद से भरे, सघन बसे मैदान पर बाढ़ बन जाती है — इसीलिए केवल वर्षा का मानचित्र नहीं, भौतिक मानचित्र बताता है कि बाढ़ कहाँ आएगी।