प्र1.
2013 में उत्तराखंड में कई दिनों तक लगातार भारी वर्षा के कारण अचानक हिमनदीय विस्फोट हो गया। इसके बाद कई भूस्खलन हुए। भारत के महत्वपूर्ण पवित्र स्थलों में से एक केदारनाथ मंदिर के आस-पास का क्षेत्र पूरी तरह से नष्ट हो गया। बाढ़ में कई गाँव बह गए। साथ ही कई सड़कें और पुल भी बह गए। कुल मिलाकर लगभग 6000 लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें से अधिकतर तीर्थयात्री थे।
उत्तर
यह बॉक्स पूरा अध्याय एक घटना में समेट देता है। इसे एक शृंखला की तरह पढ़िए, क्योंकि आपदा वास्तव में इसी क्रम में घटी :
| चरण | क्या हुआ | अध्याय का कौन-सा भाग |
|---|---|---|
| 1 | जून 2013 में कई दिनों तक लगातार भारी वर्षा | मानसून — और जलवायु परिवर्तन, जो चरम वर्षा की संभावना बढ़ाता है |
| 2 | हिमनदीय झील का चट्टान-हिम अवरोध टूटा — हिमनदीय विस्फोट | हिमालयी क्षेत्रों की बाढ़ (पृष्ठ 60) |
| 3 | जल, मलबा और शिलाखंड घाटी में उतरे; कई भूस्खलन हुए | भूस्खलन (पृष्ठ 61) |
| 4 | गाँव, सड़कें और पुल बह गए; केदारनाथ के आस-पास का क्षेत्र नष्ट हो गया | आपदाएँ आधारभूत ढाँचे को क्षति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं |
| 5 | लगभग 6000 लोगों की मृत्यु, जिनमें अधिकतर तीर्थयात्री | जलवायु की समझ क्यों आवश्यक है — महत्वपूर्ण प्रश्न 4 |
मृतकों की संख्या इतनी अधिक क्यों रही: वह जून था — चार धाम यात्रा का चरम। संकरी घाटियों में हजारों यात्री थे, जो न मार्ग जानते थे न भूगोल, और बाहर निकलने का केवल एक रास्ता था। यही बात इसे प्राकृतिक घटना से आपदा बनाती है : बाढ़ प्राकृतिक थी, पर उसके मार्ग में कितने लोग खड़े थे, यह प्राकृतिक नहीं था।
क्या आप जानते हैं? केदारनाथ मंदिर स्वयं बच गया, क्योंकि उसके ठीक पीछे आकर अटके एक विशाल शिलाखंड ने मलबे की धारा को दो भागों में बाँट दिया। स्थानीय लोग उसे भीम शिला कहते हैं।