कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्र 3.15 को देखिए। आपदा के प्रकार को पहचानिए और लोगों, पेड़-पौधों, जानवरों और आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।

चित्र 3.15 में क्या है — चार छायाचित्र, प्रत्येक पर पुस्तक में नाम छपा है :

  • चक्रवात (ऊपर बाएँ) — बड़े वृक्ष टूटकर और जड़ से उखड़कर गिरे हैं; उनके मोटे तने और टूटी डालियाँ हरी-सफ़ेद पट्टी वाली सड़क के किनारे ढेर हैं; ढेर के नीचे नीली पलास्टिक की चादरें हैं और सड़क पर पत्ते बिखरे हैं।
  • भूस्खलन (ऊपर दाएँ) — घनी हरियाली वाली खड़ी पहाड़ी, जिस पर लाल-भूरी मिट्टी और चट्टानों का चौड़ा रेला खिसककर नीचे सड़क तक आ गया है; नंगे भाग पर कीचड़ मिला पानी बह रहा है। सड़क के किनारे दो पीली खुदाई मशीनें हैं, जिनमें से एक पलटी पड़ी है, और गीली सड़क पर कुछ लोग खड़े हैं।
  • दावानल (नीचे बाएँ) — ऊंचे चीड़ के वृक्षों वाली पहाड़ी ढलान, जिस पर ज़मीन के पास नारंगी लपटों की एक लकीर फैल रही है और तनों के बीच धुएँ की हल्की परत है; पास ही लाल छतों और बालकनियों वाले सफ़ेद मकान खड़े हैं।
  • बाढ़ (नीचे दाएँ) — धूप में चमकता पानी दूर तक सूखी ज़मीन को ढके हुए है; टीन की छत वाला एक घर दीवारों तक पानी में खड़ा है, एक ताड़ और कुछ झाड़ियाँ पानी के ऊपर दिखती हैं, दूर किनारे पर घना हरा वन है और आकाश नीला है।
चित्र 3.15 (पृष्ठ 61) — प्राकृतिक आपदाओं के चार छायाचित्र; यहाँ केवल वर्णन दिया गया है, मूल छायाचित्र पाठ्यपुस्तक में देखिए।
उत्तर

चित्र 3.15 में चार आपदाएँ चार छायाचित्रों में दिखाई गई हैं — चक्रवात (नगर की सड़क पर उखड़े पड़े विशाल वृक्ष), भूस्खलन (राजमार्ग पर ढहा पहाड़ी ढलान, जिसे मशीनें हटा रही हैं), जंगल की आग (घरों के ठीक पीछे वन ढलान पर दौड़ती आग की रेखा) और बाढ़ (छत तक जल में डूबा घर, जिसके चारों ओर केवल वृक्षों की चोटियाँ दिख रही हैं)।

 चक्रवातभूस्खलनदावानलबाढ़
लोगजीवन की हानि; घरों की छतें उड़ना; कई दिनों तक बिजली और संचार ठपलोग मलबे में दबना; एकमात्र सड़क बंद होने से गाँव कट जानास्थानीय समुदायों का विस्थापन; धुएँ से वायु की गुणवत्ता बिगड़ना और साँस के रोगघर और सामान की हानि; राहत शिविरों में जीवन; दूषित जल और बीमारियाँ
पेड़-पौधेवृक्षों का उखड़ना, खड़ी फसल का बिछ जानावन और सीढ़ीदार खेत मिट्टी सहित बह जानावन के बड़े क्षेत्र नष्ट; बीज और झाड़ियाँ जलकर राखजल में फसल सड़ना; मृदा या तो कट जाना या रेत से ढक जाना
जानवरपशुओं की मृत्यु; घोंसले और आवास नष्टआवास दब जाना; नाले रुकने से मछलियों की मृत्युवन्यजीवों की मृत्यु या पलायन; पारिस्थितिकी तंत्र का ह्रासपशुधन का डूबना; भूमि पर घोंसला बनाने वाले जीवों के आवास नष्ट
आर्थिक जीवनमत्स्यन ठप; बंदरगाह, सड़कें और बिजली को क्षति; मृदा अपरदनसड़कें, पुल और पर्यटन बंद; मरम्मत का भारी व्ययइमारती लकड़ी, शहद, चारा और पर्यटन की हानि; परिणाम पर्यावरणीय और आर्थिक दोनोंफसल की हानि; बाजार और कारखाने बंद; खाद्य पदार्थों का महँगा होना

अंतिम पंक्ति में एक प्रतिरूप देखिए : हर आपदा एक ही तीन चीजों पर चोट करती है — लोगों का जीवन, कृषि और आधारभूत ढाँचा। पृष्ठ 58 पर आपदाओं वाला भाग यही कहकर आरंभ होता है।

प्र2.
चार या पाँच के समूहों में ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों की पहचान कीजिए। अपने निष्कर्षों की तुलना कीजिए।
उत्तर

नमूना उत्तर — आपके समूह को इस विभाजन तक पहुँचना चाहिए :

आपदाप्राकृतिक कारणमानवीय कारण
चक्रवातगर्म समुद्र पर निम्न दबाव तंत्र; पवन की अधिक गतिवैश्विक तापन से गर्म होते समुद्र; खुले तटों पर निर्माण; मैंग्रोव वनों का विनाश, जो पहले लहरों को सोख लेते थे
बाढ़भारी मानसूनी वर्षा; नदियों और झीलों का उफनना; हिमनदीय झीलों का फूटनाजल निकासी पर बोझ; जलमार्गों पर अतिक्रमण करता निर्माण; कंक्रीट और डामर जो जल सोखने नहीं देते; ऊपरी क्षेत्रों में वनों की कटाई; जलवायु परिवर्तन से तेजी से पिघलते हिमनद
भूस्खलनभारी वर्षा, भूकंप, ज्वालामुखी सक्रियता; स्वाभाविक रूप से तीखे ढलानवनों की कटाई; स्वीकृत विधियों का पालन किए बिना आधारभूत ढाँचे का निर्माण; जल के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने वाली अत्यधिक इमारतें
दावानलशुष्क जलवायुजन्य परिस्थितियाँ, सूखा, तेज हवाएँ; आकाशीय बिजलीमानवीय लापरवाही — बिना बुझाई गई आग, फेंकी हुई सुलगती बीड़ी, फैल जाने वाली पराली की आग
तुलना से जो निष्कर्ष निकलना चाहिए: आपदा का ट्रिगर प्रायः प्राकृतिक होता है, पर क्षति का पैमाना प्रायः मानवीय। वर्षा यह तय नहीं करती कि बाढ़ के मार्ग में कितने घर खड़े हैं, और बिजली यह तय नहीं करती कि जंगल कितना सूखा और असुरक्षित था। इसीलिए अध्याय कहता है कि मानवीय गतिविधियों के कारण भूस्खलन की संभावना ‘बढ़ गई है’ — पहाड़ नहीं बदला, उस पर हमने जो बनाया वह बदला है।
संकेत: निष्कर्षों की तुलना करते समय उन कारणों को ढूँढ़िए जो एक से अधिक पंक्तियों में आते हैं। वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन लगभग हर पंक्ति में हैं — यही बताता है कि रोकथाम कहाँ से आरंभ होनी चाहिए।
प्र3.
इन्हीं समूहों में उन उपायों पर भी चर्चा कीजिए जो उपर्युक्त आपदाओं से बचने में सहायता कर सकते हैं।
उत्तर

नमूना उत्तर — उपायों को तीन स्तरों में बाँटिए, क्योंकि हर स्तर पर काम करने वाले अलग हैं।

आपदासरकार क्या करेसमुदाय क्या करेआप क्या करें
चक्रवातमौसम विभाग की निगरानी और पूर्व-चेतावनी तंत्र; चक्रवात आश्रय-गृह; एन.डी.आर.एफ. की तैयारी; मैंग्रोव पट्टियों की रक्षानिकासी का अभ्यास; आश्रय और मार्ग पहले से तय; जल, सूखा भोजन और टॉर्च का भंडारचेतावनी संकेत सीखिए; वृद्धजनों को हटाने में सहायता कीजिए; तूफान देखने कभी तट पर न जाइए
बाढ़नालों की गाद निकालना और चौड़ा करना; जलमार्गों पर निर्माण रोकना; तटबंध; हिमनदीय झीलों की निगरानीनालियों और नहरों को प्लास्टिक से मुक्त रखना; गाँव के तालाब पुनर्जीवित करना; वर्षा जल संचयननाली में प्लास्टिक कभी न फेंकिए; मानसून से पहले जरूरी कागज जलरोधी थैली में रखिए
भूस्खलनस्वीकृत निर्माण विधियों का पालन कराना; पहाड़ी सड़कों पर नियंत्रण; ढलानों पर गहरी जड़ वाले वृक्ष; अवरोधक दीवारें और उचित जल निकासीअवैध निर्माण का विरोध; ढलानों या घरों में नई दरारों की सूचना; प्राकृतिक जल-मार्ग खुले रखनाढलानों पर पत्थर न ढकेलिए; झुकते वृक्ष और गँदला होता झरना — ये आरंभिक चेतावनियाँ पहचानिए
दावानलशुष्क ऋतु से पहले अग्नि-रेखाएँ; निगरानी मीनारें; उपग्रह से आग की चेतावनी; वनकर्मियों का प्रशिक्षण और उपकरणगाँव की अग्नि-निगरानी टोलियाँ; शुष्क और हवादार मौसम में पराली न जलानापिकनिक की आग पूरी तरह बुझाइए; वन में काँच या सुलगती वस्तु कभी न छोड़िए; धुआँ दिखते ही सूचना दीजिए

और एक उपाय जो चारों पर लागू होता है : अध्याय का अपना उत्तर — न्यूनीकरण और अनुकूलन। हरितगृह गैसों में कटौती, वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत जीवन-शैली चरम स्थितियों को घटाते हैं; समुदायों में लचीलापन बनाना उन स्थितियों के आने पर हानि को घटाता है।

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