चित्र 3.15 में क्या है — चार छायाचित्र, प्रत्येक पर पुस्तक में नाम छपा है :
- चक्रवात (ऊपर बाएँ) — बड़े वृक्ष टूटकर और जड़ से उखड़कर गिरे हैं; उनके मोटे तने और टूटी डालियाँ हरी-सफ़ेद पट्टी वाली सड़क के किनारे ढेर हैं; ढेर के नीचे नीली पलास्टिक की चादरें हैं और सड़क पर पत्ते बिखरे हैं।
- भूस्खलन (ऊपर दाएँ) — घनी हरियाली वाली खड़ी पहाड़ी, जिस पर लाल-भूरी मिट्टी और चट्टानों का चौड़ा रेला खिसककर नीचे सड़क तक आ गया है; नंगे भाग पर कीचड़ मिला पानी बह रहा है। सड़क के किनारे दो पीली खुदाई मशीनें हैं, जिनमें से एक पलटी पड़ी है, और गीली सड़क पर कुछ लोग खड़े हैं।
- दावानल (नीचे बाएँ) — ऊंचे चीड़ के वृक्षों वाली पहाड़ी ढलान, जिस पर ज़मीन के पास नारंगी लपटों की एक लकीर फैल रही है और तनों के बीच धुएँ की हल्की परत है; पास ही लाल छतों और बालकनियों वाले सफ़ेद मकान खड़े हैं।
- बाढ़ (नीचे दाएँ) — धूप में चमकता पानी दूर तक सूखी ज़मीन को ढके हुए है; टीन की छत वाला एक घर दीवारों तक पानी में खड़ा है, एक ताड़ और कुछ झाड़ियाँ पानी के ऊपर दिखती हैं, दूर किनारे पर घना हरा वन है और आकाश नीला है।
चित्र 3.15 में चार आपदाएँ चार छायाचित्रों में दिखाई गई हैं — चक्रवात (नगर की सड़क पर उखड़े पड़े विशाल वृक्ष), भूस्खलन (राजमार्ग पर ढहा पहाड़ी ढलान, जिसे मशीनें हटा रही हैं), जंगल की आग (घरों के ठीक पीछे वन ढलान पर दौड़ती आग की रेखा) और बाढ़ (छत तक जल में डूबा घर, जिसके चारों ओर केवल वृक्षों की चोटियाँ दिख रही हैं)।
| चक्रवात | भूस्खलन | दावानल | बाढ़ | |
|---|---|---|---|---|
| लोग | जीवन की हानि; घरों की छतें उड़ना; कई दिनों तक बिजली और संचार ठप | लोग मलबे में दबना; एकमात्र सड़क बंद होने से गाँव कट जाना | स्थानीय समुदायों का विस्थापन; धुएँ से वायु की गुणवत्ता बिगड़ना और साँस के रोग | घर और सामान की हानि; राहत शिविरों में जीवन; दूषित जल और बीमारियाँ |
| पेड़-पौधे | वृक्षों का उखड़ना, खड़ी फसल का बिछ जाना | वन और सीढ़ीदार खेत मिट्टी सहित बह जाना | वन के बड़े क्षेत्र नष्ट; बीज और झाड़ियाँ जलकर राख | जल में फसल सड़ना; मृदा या तो कट जाना या रेत से ढक जाना |
| जानवर | पशुओं की मृत्यु; घोंसले और आवास नष्ट | आवास दब जाना; नाले रुकने से मछलियों की मृत्यु | वन्यजीवों की मृत्यु या पलायन; पारिस्थितिकी तंत्र का ह्रास | पशुधन का डूबना; भूमि पर घोंसला बनाने वाले जीवों के आवास नष्ट |
| आर्थिक जीवन | मत्स्यन ठप; बंदरगाह, सड़कें और बिजली को क्षति; मृदा अपरदन | सड़कें, पुल और पर्यटन बंद; मरम्मत का भारी व्यय | इमारती लकड़ी, शहद, चारा और पर्यटन की हानि; परिणाम पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों | फसल की हानि; बाजार और कारखाने बंद; खाद्य पदार्थों का महँगा होना |
अंतिम पंक्ति में एक प्रतिरूप देखिए : हर आपदा एक ही तीन चीजों पर चोट करती है — लोगों का जीवन, कृषि और आधारभूत ढाँचा। पृष्ठ 58 पर आपदाओं वाला भाग यही कहकर आरंभ होता है।