चित्र 3.15 में चार आपदाएँ चार छायाचित्रों में दिखाई गई हैं — चक्रवात (नगर की सड़क पर उखड़े पड़े विशाल वृक्ष), भूस्खलन (राजमार्ग पर ढहा पहाड़ी ढलान, जिसे मशीनें हटा रही हैं), जंगल की आग (घरों के ठीक पीछे वन ढलान पर दौड़ती आग की रेखा) और बाढ़ (छत तक जल में डूबा घर, जिसके चारों ओर केवल वृक्षों की चोटियाँ दिख रही हैं)।
| चक्रवात | भूस्खलन | दावानल | बाढ़ | |
|---|---|---|---|---|
| लोग | जीवन की हानि; घरों की छतें उड़ना; कई दिनों तक बिजली और संचार ठप | लोग मलबे में दबना; एकमात्र सड़क बंद होने से गाँव कट जाना | स्थानीय समुदायों का विस्थापन; धुएँ से वायु की गुणवत्ता बिगड़ना और साँस के रोग | घर और सामान की हानि; राहत शिविरों में जीवन; दूषित जल और बीमारियाँ |
| पेड़-पौधे | वृक्षों का उखड़ना, खड़ी फसल का बिछ जाना | वन और सीढ़ीदार खेत मिट्टी सहित बह जाना | वन के बड़े क्षेत्र नष्ट; बीज और झाड़ियाँ जलकर राख | जल में फसल सड़ना; मृदा या तो कट जाना या रेत से ढक जाना |
| जानवर | पशुओं की मृत्यु; घोंसले और आवास नष्ट | आवास दब जाना; नाले रुकने से मछलियों की मृत्यु | वन्यजीवों की मृत्यु या पलायन; पारिस्थितिकी तंत्र का ह्रास | पशुधन का डूबना; भूमि पर घोंसला बनाने वाले जीवों के आवास नष्ट |
| आर्थिक जीवन | मत्स्यन ठप; बंदरगाह, सड़कें और बिजली को क्षति; मृदा अपरदन | सड़कें, पुल और पर्यटन बंद; मरम्मत का भारी व्यय | इमारती लकड़ी, शहद, चारा और पर्यटन की हानि; परिणाम पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों | फसल की हानि; बाजार और कारखाने बंद; खाद्य पदार्थों का महँगा होना |
अंतिम पंक्ति में एक प्रतिरूप देखिए : हर आपदा एक ही तीन चीजों पर चोट करती है — लोगों का जीवन, कृषि और आधारभूत ढाँचा। पृष्ठ 58 पर आपदाओं वाला भाग यही कहकर आरंभ होता है।