चक्रवात का आरंभ समुद्र के पास बने निम्न दबाव तंत्र से होता है, और वह तब चक्रवात बनता है जब यह तंत्र तीव्र हो और पवन की गति अधिक हो।
पृष्ठ 59 में वर्णित और चित्र 3.13 तथा 3.14 में दिखाई गई संरचना — भीतर की ओर घूमता बादलों का छल्ला और बीच में स्वच्छ केंद्र।
अध्याय के क्रम में, चरण-दर-चरण :
कुछ विशेष परिस्थितियों में समुद्र के पास वायुमंडलीय दबाव आस-पास के क्षेत्रों से कम हो जाता है और निम्न दबाव तंत्र बनता है।
यह स्थिति आस-पास के क्षेत्रों से पवन को उस ओर खींचती है; समुद्र से आती वायु अपने साथ नमी और वर्षा लाती है।
जब निम्न दबाव तंत्र तीव्र हो और पवन की गति अधिक हो, तो इसका परिणाम चक्रवात हो सकता है।
जैसे-जैसे पवनें नमी एकत्र करती हैं, वे बादल बनाती हैं और बाहर से अवदाब केंद्र की ओर घूमती हैं।
यह केंद्र बादलरहित होता है और इसे ‘चक्रवात की आँख’ कहा जाता है (चित्र 3.14)।
कहाँ और क्या करते हैं। प्रतिवर्ष भारतीय तटरेखा — विशेष रूप से पूर्वी तट — कई चक्रवातों का सामना करती है। विनाशकारी चक्रवातों से मानव और पशु जीवन की हानि होती है, संपत्ति एवं आधारभूत ढाँचे को नुकसान पहुँचता है, पेड़ उखड़ जाते हैं और मृदा अपरदन होता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग आने वाले चक्रवातों पर नजर रखता है और उनके बनने, विकास तथा प्रभावित क्षेत्र की पूर्व जानकारी देता है।
आँख शांत क्यों रहती है: भीतर की ओर घूमती वायु केंद्र के चारों ओर बने बादल-छल्ले में ऊपर उठती है। ठीक बीच में वायु धीरे-धीरे नीचे बैठती है, और नीचे बैठती वायु बादल नहीं बनाती। इसीलिए पृथ्वी के सबसे प्रचंड तूफान के हृदय में नीले आकाश का एक टुकड़ा होता है। यही सबसे खतरनाक क्षण भी है — जब आँख ऊपर से गुजरती है, लोग समझते हैं कि तूफान बीत गया और बाहर निकल आते हैं, ठीक उससे पहले कि पवनों की दूसरी दीवार आ पहुँचे।
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