अन्वेषण अध्याय 3 प्रश्न और क्रियाकलाप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जलवायु के कारकों का उनके प्रभावों के साथ निम्नलिखित सूची में मिलान कीजिए — अ : (1) अक्षांश, (2) ऊँचाई, (3) समुद्र से निकटता, (4) मानसूनी पवन। ब : (क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। (ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। (ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। (घ) तापमान को प्रभावित करता है।
उत्तर
उत्तरक्यों
(1) अक्षांश(ख)उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है।अक्षांश सूर्य की किरणों का कोण तय करता है — इसीलिए दक्षिण में कन्याकुमारी पूरे वर्ष गर्म और उत्तर में श्रीनगर ठंडा रहता है
(2) ऊँचाई(ग)ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है।ऊँचाई पर वायुदाब और घनत्व घटते हैं और तप्त धरातल दूर होता है — ऊटी बनाम कोयंबटूर
(3) समुद्र से निकटता(घ)तापमान को प्रभावित करता है।समुद्र तापमान को नियंत्रित करता है — मुंबई का ताप परिसर लगभग 14°C, नागपुर का 34°C
(4) मानसूनी पवन(क)भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है।दक्षिण-पश्चिम मानसून महासागर से नम वायु को तप्त भूभाग की ओर खींचता है, जो वर्षा बनकर गिरती है
1 – ख    2 – ग    3 – घ    4 – क
प्र2.
नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए — क) मौसम और जलवायु में क्या अंतर है?
उत्तर

मौसम वह है जिसे हम प्रतिदिन या हर घंटे अनुभव करते हैं — वर्षा, तेज धूप या तेज हवा। यह समय-समय पर परिवर्तित होता रहता है।

जलवायु मौसम का वह प्रतिरूप है जो किसी क्षेत्र या प्रदेश में लंबे समय तक — कम से कम कई दशकों तक — अनुभव किया जाता है। यह प्रतिरूप क्षेत्रानुसार अलग-अलग होता है और सामान्यतया स्थिर बना रहता है।

 मौसमजलवायु
अवधिघंटे या दिनतीन दशक या उससे अधिक
स्थिरतानिरंतर बदलता हैलंबे समय तक स्थिर
क्या बताता हैआज की वर्षा, धूप, हवाकिसी क्षेत्र में तापमान, वर्षण और पवन की दशा का प्रतिरूप
उदाहरण‘आज जयपुर में बहुत तेज हवा है’‘जयपुर की जलवायु अर्ध-शुष्क से शुष्क है’
संकेत: परीक्षक ‘दिन-प्रतिदिन’ और ‘दशकों तक’ — ये दोनों शब्द खोजते हैं। दोनों लिख दीजिए, उत्तर पूरा हो जाएगा।
प्र3.
ख) समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि समुद्र तापमान को नियंत्रित करता है। भूमि ऊष्मा का अवशोषण शीघ्रता से करती है और शीघ्रता से छोड़ भी देती है; समुद्र ऊष्मा धीरे-धीरे अवशोषित करता है और धीरे-धीरे ही छोड़ता है।

ऋतुसमुद्र क्या करता हैतट पर प्रभाव
ग्रीष्मसमुद्र ऊष्मा धीरे अवशोषित करता है, इसलिए भूमि से ठंडा रहता हैसमुद्री पवन तटीय क्षेत्र को ठंडा करती है — गर्मियाँ बहुत गर्म नहीं होतीं
शीतसमुद्र ऊष्मा धीरे छोड़ता है, इसलिए भूमि से गर्म रहता हैसमुद्री पवन तटीय क्षेत्र को गर्म करती है — सर्दियाँ बहुत ठंडी नहीं होतीं

तट से स्थल की ओर बढ़ते ही तापमान अधिक चरम होता जाता है — ग्रीष्म में अधिक और शीत में कम। अध्याय की अपनी जोड़ी इसे सिद्ध करती है :

मुंबई (समुद्र के पास) : ग्रीष्म ≈ 32°C, शीत ≈ 18°C
ताप परिसर = 32 − 18 = 14°C

नागपुर (तट से दूर) : ग्रीष्म 44°C तक, शीत ≈ 10°C
ताप परिसर = 44 − 10 = 34°C

अक्षांश एक ही, फिर भी नागपुर का परिसर 20°C अधिक चौड़ा
जल ऐसा व्यवहार क्यों करता है: उतना ही गर्म होने के लिए जल को मिट्टी या चट्टान से कहीं अधिक ऊष्मा चाहिए, और समुद्र अपनी गर्म सतह को लगातार ठंडी गहराई में मिलाता भी रहता है। इसलिए तट केवल वायु से नहीं, ऊष्मा के एक विशाल और धीमे भंडार से जुड़ा होता है, जो दोनों अतियों को दबा देता है।
प्र4.
ग) भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की क्या भूमिका है?
उत्तर

मानसूनी पवनें ही भारत को उसकी पाँचवीं ऋतु और अधिकांश जल देती हैं। ये दो विपरीत चरणों में काम करती हैं।

 ग्रीष्म / दक्षिण-पश्चिम मानसूनशीत / उत्तर-पूर्व मानसून
दाबतप्त एशियाई भूभाग = निम्न दाब; ठंडा महासागर = उच्च दाबठंडा भूभाग = उच्च दाब; अपेक्षाकृत गर्म महासागर = निम्न दाब
पवन की दिशामहासागर से स्थल की ओरस्थल से महासागर की ओर
क्या लाती हैनमी, जो गर्म भूभाग पर संघनित होती हैशुष्क वायु — पर इनका एक भाग बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण कर लेता है
परिणामभारी मानसूनी वर्षा; जून के आरंभ में दक्षिणी सिरे पर, जुलाई के मध्य तक पूरे उपमहाद्वीप परदक्षिण भारत में ठंडा शुष्क मौसम, किंतु पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ भागों में वर्षा

भारतीय जलवायु पर इनका प्रभाव :

  • ये भारत को एक विशिष्ट वर्षा ऋतु देती हैं, जो विश्व के अधिकांश भागों में नहीं होती।
  • ये पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप की उष्णकटिबंधीय जलवायु की आर्द्र और शुष्क अवधियाँ बनाती हैं।
  • स्थलाकृति के साथ मिलकर ये देश को बाँट देती हैं : पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलानों पर भारी वर्षा (उष्ण आर्द्र), जबकि पीछे दक्कन पठार पर कम और अंतरालों वाली वर्षा (अर्ध-शुष्क)।
  • ये पूरे कृषि-वर्ष को नियंत्रित करती हैं — “नदियाँ जल से भर जाती हैं, मिट्टी में नमी आ जाती है, फसलें उगती हैं और जीवन फलता-फूलता है।”
प्र5.
घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म क्यों रहता है, जबकि लेह ठंडा रहता है?
उत्तर

दोनों में पाँच कारकों में से दो तीव्र रूप से भिन्न हैं — अक्षांश और ऊँचाई — और दोनों एक ही दिशा में काम करते हैं।

कारकचेन्नईलेह
अक्षांशनिम्न — दक्षिणी प्रायद्वीप में, भूमध्य रेखा के निकट, इसलिए किरणें लगभग लंबवत और ऊर्जा केंद्रितउच्च — सुदूर उत्तर, इसलिए किरणें तिरछी, बड़े क्षेत्र पर फैली और वायुमंडल के लंबे मार्ग से क्षीण
ऊँचाईतटीय मैदान पर, लगभग समुद्र तल के बराबरहिमालय में बहुत ऊँचाई पर — विरल वायु और तप्त धरातल से बहुत दूर, इसलिए कहीं अधिक ठंडा
समुद्र से निकटताबंगाल की खाड़ी के तट पर, इसलिए समुद्र तापमान को नियंत्रित करता है — कड़ाके की सर्दी नहीं पड़तीपूर्णतः भीतरी क्षेत्र, कोई नियंत्रक समुद्र नहीं, इसलिए सर्दियाँ अत्यंत कठोर
जलवायु का प्रकारउष्णकटिबंधीय — लगभग पूरे वर्ष गर्म, आर्द्र, उत्तर-पूर्व मानसून से वर्षाअल्पाइन — अत्यधिक ठंडी बर्फीली शीत ऋतु और शीतल ग्रीष्म
चेन्नई — निम्न अक्षांश + समुद्र तल के पास + समुद्र के किनारे → पूरे वर्ष गर्म
लेह — उच्च अक्षांश + बहुत अधिक ऊँचाई + तट से बहुत दूर → ठंडा
क्या आप जानते हैं? लेह अत्यंत शुष्क भी है। यह हिमालय के उस पार है, जो मानसून को रोक देता है, इसलिए यह एक शीत मरुस्थल है — थार जितना ही शुष्क, पर तपता नहीं, जमता है।
प्र6.
इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र को देखिए। लेह, चेन्नई, दिल्ली, पणजी, इन शहरों की जलवायु को पहचानिए। क्या यह स्थान समुद्र के समीप हैं, पर्वत पर हैं या रेगिस्तान में हैं? ये कारक वहाँ की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर

पुस्तक के अंत में दिए भौतिक मानचित्र पर प्रत्येक नगर खोजिए, देखिए वह किस प्रकार की भूमि पर है, और फिर पृष्ठ 48 की सूची से उसकी जलवायु पढ़ लीजिए।

नगरकहाँ स्थित हैजलवायुकारक कैसे काम करते हैं
लेहहिमालय में बहुत ऊँचाई पर (लद्दाख), मुख्य शृंखलाओं के पार, तट से बहुत दूरअल्पाइन — शीत मरुस्थलबहुत अधिक ऊँचाई और उच्च अक्षांश इसे ठंडा बनाते हैं; पर्वत मानसून को रोक देते हैं, इसलिए यह अत्यंत शुष्क भी है — शीतल ग्रीष्म और जमा देने वाली, बर्फीली सर्दियाँ
चेन्नईपूर्वी तट पर, बंगाल की खाड़ी के किनारेउष्णकटिबंधीयनिम्न अक्षांश से पूरे वर्ष तेज धूप; समुद्र ताप परिसर छोटा और वायु आर्द्र रखता है; उत्तर-पूर्व मानसून से अक्टूबर–दिसंबर में मुख्य वर्षा
दिल्लीउत्तरी मैदानों में, समुद्र से बहुत दूरउपोष्ण कटिबंधीयनियंत्रित करने वाला समुद्र नहीं, इसलिए ग्रीष्म अत्यधिक गर्म और शीत ठंडी; पश्चिम से आती गर्म शुष्क पवनें ताप लहर और उत्तर की ठंडी पवनें शीत लहर लाती हैं; वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से
पणजीपश्चिमी तटीय पट्टी पर, ठीक पीछे पश्चिमी घाटउष्णकटिबंधीय आर्द्रसमुद्र पूरे वर्ष तापमान सम रखता है; पश्चिमी घाट दक्षिण-पश्चिम मानसून को ऊपर उठाकर भारी वर्षा कराता है — चावल और मसालों के अनुकूल
ध्यान दीजिए: हिंदी पुस्तक में इस प्रश्न में चार नगर दिए गए हैं — लेह, चेन्नई, दिल्ली और पणजी। अंग्रेजी संस्करण में इनके साथ जयपुर भी है, जो राजस्थान में थार मरुस्थल के किनारे स्थित है और जिसकी जलवायु शुष्क से अर्ध-शुष्क है — मरुस्थल से आती गर्म शुष्क पवनें, समतल स्थलाकृति और समुद्र से दूरी के कारण दिन अत्यधिक गर्म, रातें ठंडी और वर्षा बहुत कम।
एक ही देश में ये सब कैसे: इन नगरों को मानचित्र पर रखिए और आप अध्याय के हर कारक से होकर गुजर जाएँगे — चेन्नई से लेह तक 3,000 किलोमीटर का अक्षांश, 3,500 मीटर की ऊँचाई, तट से लेकर देश के भीतरी हृदय तक, और मरुस्थल से लेकर वर्षा में भीगे घाटों तक। जलवायु की विविधता वास्तव में आकाश से देखी गई भूगोल की विविधता है।
प्र7.
भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को प्रदर्शित कीजिए। गर्मियों और सर्दियों में पवनें कहाँ चलती हैं, इसके प्रतीक लगाइए। मानसून के दौरान पवनों की दिशा दिखाइए।
उत्तर

कैसे बनाएँ। चित्र 3.9 की तरह भारत के दो रेखा-मानचित्र साथ-साथ बनाइए — एक पर क) ग्रीष्म ऋतु और दूसरे पर ख) शीत ऋतु लिखिए। समुद्र से भीतर आती पवनों के लिए एक रंग और भूमि से बाहर जाती पवनों के लिए दूसरा रंग लीजिए।

ग्रीष्म वाले मानचित्र परशीत वाले मानचित्र पर
उत्तर-पश्चिम भारत / एशियाई भूभाग पर निम्न दाब लिखिएभूभाग पर उच्च दाब लिखिए
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी पर उच्च दाब लिखिएअपेक्षाकृत गर्म महासागर पर निम्न दाब लिखिए
समुद्र से स्थल की ओर तीर बनाइए : एक शाखा अरब सागर से पश्चिमी घाट से टकराती हुई, दूसरी बंगाल की खाड़ी से पूर्वोत्तर में मुड़कर हिमालय के साथ उत्तर-पश्चिम की ओरस्थल से समुद्र की ओर तीर बनाइए, जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर जाएँ
उन्हें दक्षिण-पश्चिम मानसून नाम दीजिए; लिखिए ‘नम पवनें — भारी वर्षा’उन्हें उत्तर-पूर्व मानसून नाम दीजिए; लिखिए ‘शुष्क पवनें’, और एक तीर बंगाल की खाड़ी पार करते हुए दिखाइए जो नमी लेकर कोरोमंडल तट पर वर्षा करता है
आगमन की तिथियाँ लिखिए : दक्षिणी सिरा जून का आरंभ → पूरा देश जुलाई के मध्य तकलिखिए ‘अक्टूबर–दिसंबर, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ भागों में वर्षा’
भारत क) ग्रीष्म ऋतु स्थल पर निम्न दाब अरब सागर बंगाल की खाड़ी भारत ख) शीत ऋतु स्थल पर उच्च दाब शुष्क पवनें समुद्र की ओर
आपको जो दो मानचित्र बनाने हैं, उनका मोटा खाका। रेखाचित्र पुस्तक के अंत के मानचित्र से बनाइए और ग्रीष्म मानसून की दोनों शाखाएँ अवश्य दिखाइए।
संकेत: नाम यह बताते हैं कि पवन कहाँ से आती है, कहाँ जाती है यह नहीं। ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून’ दक्षिण-पश्चिम से भारत की ओर चलता है; ‘उत्तर-पूर्व मानसून’ उत्तर-पूर्व से समुद्र की ओर जाता है। तीरों की दिशा उलट देना इस प्रश्न की सबसे आम भूल है।
ध्यान दीजिए: हिंदी संस्करण के चित्र 3.9 में शीत ऋतु वाले मानचित्र पर ‘उत्तर-पश्चिम मानसून’ छपा है, जबकि उसी पुस्तक के पृष्ठ 55 का पाठ इसे स्पष्ट रूप से उत्तर-पूर्व मानसून कहता है (अंग्रेजी संस्करण में भी ‘northeast monsoon’ है)। अपने उत्तर में उत्तर-पूर्व मानसून ही लिखिए।
प्र8.
भारत में कृषि और मौसम से जुड़े त्योहारों (जैसे – बैसाखी, ओणम) को दिखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाइए। इन त्योहारों की तस्वीरें या रेखाचित्र लगाइए।
उत्तर

पोस्टर कैसे बनाएँ। चित्र यूँ ही बिखेरिए मत — पोस्टर को ऐसा आकार दीजिए जो स्वयं कुछ कहे। सबसे अच्छा तरीका है वर्ष का एक वृत्त, जिसमें प्रत्येक त्योहार अपने महीने पर रखा हो, ताकि देखते ही समझ आ जाए कि त्योहार कृषि-पंचांग के साथ चलते हैं।

अच्छे पोस्टर में हर त्योहार के लिए इतना अवश्य हो : नाम, राज्य या क्षेत्र, महीना/ऋतु, और एक पंक्ति में वह किस कृषि-घटना का उत्सव है — साथ में चित्र या रेखाचित्र।

नमूना उत्तर — अध्याय के चित्र 3.11 के ग्यारह त्योहार, वर्ष के क्रम में :

त्योहारकहाँकबकिसका उत्सव
लोहड़ीपंजाब13 जनवरीसबसे कड़ाके की ठंड का अंत; गन्ने और रबी की फसल; मूँगफली-रेवड़ी के साथ अलाव
मकर संक्रांतिपूरे भारत में14–15 जनवरीसूर्य का उत्तरायण — दिन बड़े होने लगते हैं; पतंगबाजी
पोंगलतमिलनाडुजनवरी मध्यधान की फसल; नए मिट्टी के बर्तन में नया चावल उबालना, मट्टु पोंगल पर बैलों का सम्मान
लोसुंगसिक्किमदिसंबरफसल ऋतु का अंत, सिक्किमी नववर्ष
गुडी पड़वामहाराष्ट्रमार्च–अप्रैलवसंत और नववर्ष; रबी की फसल घर आ चुकी होती है
बैसाखीपंजाब, हरियाणा13–14 अप्रैलगेहूँ की फसल; खेतों में भांगड़ा और गिद्दा
बिहू (रोंगाली)असमअप्रैल मध्यकृषि वर्ष और बुवाई ऋतु का आरंभ
हेमिसलद्दाखजून–जुलाईछोटी गर्म ऋतु में, जब ऊँचे दर्रे खुले होते हैं
ओणमकेरलअगस्त–सितंबरदक्षिण-पश्चिम मानसून के अंत की फसल; नौका दौड़ और ओणसद्या
छठ पूजाबिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंडअक्टूबर–नवंबरखरीफ की फसल के बाद सूर्य को धन्यवाद; नदी में खड़े होकर अर्घ्य
अवि शीतकालीन महोत्सवअरुणाचल प्रदेशशीत ऋतुठंडे महीनों का सामुदायिक उत्सव, नृत्य और पारंपरिक वेशभूषा के साथ
संकेत: पोस्टर के नीचे एक वाक्य अवश्य लिखिए, जैसे — “इस पोस्टर का हर त्योहार असल में कृषि-पंचांग की एक तिथि है : बुवाई, पहली वर्षा या फसल।” यही एक पंक्ति सजी हुई शीट को उत्तर बना देती है।
प्र9.
कल्पना कीजिए कि आप भारत में एक किसान हैं। बरसात के मौसम के लिए आप कैसे तैयारी करेंगे? इस बारे में डायरी में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर

अच्छी डायरी-प्रविष्टि में क्या चाहिए: तिथि और स्थान, उत्तम पुरुष (‘मैं’), सामान्य आशाओं के स्थान पर ठोस काम, एक चिंता, और प्रकृति का एक संकेत कि वर्षा आ रही है — यह अंतिम स्पर्श आपके उत्तर को सीधे पृष्ठ 56 से जोड़ देता है।

नमूना उत्तर:

28 मई — गाँव कोंढवा, महाराष्ट्र

कुएँ के पास वाला अमलतास दस दिन पहले खिल गया था, और कल शाम चींटियाँ अपने अंडे लेकर मेड़ पर लंबी कतार में ऊपर जा रही थीं। दादाजी कहते थे कि इसका अर्थ है वर्षा निकट है। रेडियो कहता है मानसून केरल पहुँच चुका है, तो शायद हमारे पास दो सप्ताह हैं।

आज ऊपर वाले खेत की जुताई पूरी कर ली और ढेलों को धूप में तपने दिया; कल उसे समतल करूँगा, ताकि पानी बहकर मिट्टी न ले जाए। पूर्व की ओर की मेड़, जो पिछले वर्ष टूट गई थी, बाँध दी है, और सड़क से तालाब तक जाने वाली छोटी नाली साफ कर दी है — वह प्लास्टिक और काँटों से भरी पड़ी थी।

सोयाबीन का बीज खरीदकर अटारी में सूखा रखा है, कीड़ों से बचाने को नीम के पत्तों के साथ। मैंने अभी बोया नहीं है, और पड़ोसी चाहे जो करें, मैं जल्दी नहीं करूँगा। दो वर्ष पहले पहली बौछार पर आधे गाँव ने बो दिया था और फिर तीन सप्ताह वर्षा ही नहीं हुई — सब सूख गया और बीज का पैसा भी गया। इस बार वर्षा जम जाने की प्रतीक्षा करूँगा।

अभी बाकी है : गोशाला की टपकती छत ठीक करना, पंप के लिए एक पाइप लाना और बैलों को दिखाना। यदि इस बार वर्षा अच्छी रही तो सहकारी समिति का ऋण चुका दूँगा और शायद एक पुराना छिड़काव-यंत्र भी ले लूँ।

वर्षा समय पर आए, और एक साथ न आए।

संकेत: यहाँ कमजोर और अच्छे उत्तर का अंतर ब्योरे का है। ‘मैं अपना खेत तैयार करूँगा’ कुछ नहीं कहता; ‘मैंने खेत समतल किया ताकि पानी मिट्टी न बहा ले जाए’ दिखाता है कि आपने अध्याय समझा है।
प्र10.
किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे – चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन या दावानल) की पहचान कीजिए और एक छोटा निबंध लिखिए, जिसमें इसके कारण और प्रभाव सम्मिलित हों। ऐसे सुझाव दीजिए जो व्यक्ति, समुदाय और सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
उत्तर

निबंध की रूपरेखा — पाँच छोटे अनुच्छेद : (1) आपदा का नाम और एक वास्तविक उदाहरण, (2) कारण — प्राकृतिक और मानवीय, (3) लोगों, पेड़-पौधों, जानवरों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, (4) व्यक्ति, समुदाय और सरकार के उपाय, (5) समापन वाक्य।

नमूना उत्तर — बाढ़

यह क्या है। जब शुष्क भूमि पर जल का अति प्रवाह होने लगता है, तो बाढ़ आती है। ऐसा भारी वर्षा से हो सकता है, जब सतह पर इतना जल बह निकले कि भूमि उसे सोख न पाए, या तब जब नदियों और झीलों में इतना जल जमा हो जाए कि वह बाहर बहने लगे और किनारे टूट जाएँ। प्रायः बाढ़ मानसून के दौरान आती है और असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल तथा आंध्र प्रदेश विशेष रूप से संवेदनशील हैं। 2013 में उत्तराखंड में एक अलग प्रकार की बाढ़ आई : कई दिनों की लगातार भारी वर्षा से हिमनदीय विस्फोट हुआ, फिर भूस्खलन हुए, केदारनाथ मंदिर के आस-पास का क्षेत्र नष्ट हो गया और लगभग 6000 लोगों — जिनमें अधिकतर तीर्थयात्री थे — की मृत्यु हुई।

कारण। प्राकृतिक कारण हैं भारी मानसूनी वर्षा, हिम-जल से भरी नदियाँ, धीमे निकास वाली समतल भूमि, और हिमनदीय झीलों का अवरोध तोड़ना। मानवीय कारण क्षति को कहीं अधिक बढ़ा देते हैं : ऊपरी क्षेत्रों में वनों की कटाई, जिससे वर्षा नंगे ढलानों से तेजी से बह आती है; जलमार्गों पर अतिक्रमण करता निर्माण; शहरों की जल निकासी पर अत्यधिक बोझ; कंक्रीट और डामर की सतहें जो जल को भूमि में सोखने नहीं देतीं; और जलवायु परिवर्तन, जो हिमनदों को तेजी से पिघला रहा है और वर्षा को अधिक चरम बना रहा है।

प्रभाव। लोग घर और कभी-कभी जीवन खो देते हैं; परिवार राहत शिविरों में रहते हैं और दूषित जल पीते हैं, जिससे बीमारियाँ फैलती हैं। खड़ी फसल सड़ जाती है और किसानों तथा श्रमिकों की पूरे वर्ष की आय चली जाती है, जिससे वे नगरों की ओर पलायन करते हैं। पशुधन डूब जाता है। सड़कें, पुल, विद्यालय और बिजली की लाइनें नष्ट हो जाती हैं, और जो धन नया बनाने में लगता, वह पुराने की मरम्मत में चला जाता है। खाद्यान्न सबके लिए महँगा हो जाता है और मुद्रास्फीति बढ़ती है — बाढ़ सैकड़ों किलोमीटर दूर की रसोइयों में भी महसूस होती है।

क्या किया जा सकता है।

व्यक्तिसमुदायसरकार
नाली में प्लास्टिक कभी न फेंकें; कागज और मूल्यवान वस्तुएँ ऊँचाई पर रखें; चेतावनी संकेत और ऊँची जगह तक का रास्ता सीखें; वृद्ध पड़ोसियों को समय रहते हटाने में सहायता करेंमानसून से पहले नालियाँ और नहरें साफ करें; गाँव के तालाब पुनर्जीवित करें; ढलानों और किनारों पर वृक्ष लगाएँ; जलमार्गों पर अवैध निर्माण का विरोध और सूचना दें; बचाव तथा प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण चलाएँबाढ़ पूर्वानुमान और पूर्व-चेतावनी तंत्र; नदियों की गाद निकालना और नाले चौड़े करना; तटबंधों का निर्माण और रखरखाव; भवन-नियमों का कड़ा पालन और अतिक्रमण हटाना; हिमालयी हिमनदीय झीलों की निगरानी; एन.डी.आर.एफ. को सुसज्जित और तैयार रखना; शीघ्र राहत और फसल बीमा

निष्कर्ष। बाढ़ का आरंभ वर्षा से होता है, जिसे कोई रोक नहीं सकता। किंतु वर्षा को आपदा बनाती है एक बंद नाली, एक कटा हुआ जंगल और नदी के मार्ग में बना एक घर — और इनमें से हर एक मनुष्य का लिया हुआ निर्णय है। इसीलिए जलवायु की समझ महत्वपूर्ण है : वह जल को हटाती नहीं, पर बता देती है कि कहाँ खड़े नहीं होना चाहिए।

क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ