गणित प्रकाश अध्याय 6 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सुझाई गई सर्वसमिका का उपयोग करके गुणनफलों की गणना कीजिए। (i) 46² का मान, (a + b)² के लिए सर्वसमिका 1A का उपयोग करते हुए (ii) 397 × 403 का मान, (a + b) (a – b) के लिए सर्वसमिका 1C का उपयोग करते हुए (iii) 91² का मान, (a – b)² के लिए सर्वसमिका 1B का उपयोग करते हुए (iv) 43 × 45 का मान, (a + b)(a – b) के लिए सर्वसमिका 1C का उपयोग करते हुए
उत्तर
(i) 46² = (40 + 6)²
= 40² + 2 × 40 × 6 + 6²
= 1600 + 480 + 36 = 2116
(ii) 397 × 403 = (400 – 3)(400 + 3)
= 400² – 3²
= 160000 – 9 = 159991
(iii) 91² = (100 – 9)²
= 100² + 9² – 2 × 100 × 9
= 10000 + 81 – 1800 = 8281
(iv) 43 × 45 = (44 – 1)(44 + 1)
= 44² – 1²
= 1936 – 1 = 1935
संकेत: (iv) में 43 और 45 के ठीक बीच 44 है। सर्वसमिका 1C किन्हीं दो संख्याओं पर लगाई जा सकती है — a उनका मध्य और b उनके अंतर का आधा — पर बचत तभी होती है जब a² सरल हो।
प्र2.
निम्नलिखित प्रत्येक गुणनफल को ज्ञात करने के लिए उपयुक्त सर्वसमिका अथवा वितरण गुणधर्म का उपयोग कीजिए। (i) (p – 1) (p + 11) (ii) (3a – 9b) (3a + 9b) (iii) – (2y + 5) (3y + 4) (iv) (6x + 5y)² (v) (2x – 1⁄2)² (vi) (7p) × (3r) × (p + 2)
उत्तर
(i) (p – 1)(p + 11) = p² + 11p – p – 11
= p² + 10p – 11 (वितरण गुणधर्म)
(ii) (3a – 9b)(3a + 9b) = (3a)² – (9b)²
= 9a² – 81b² (सर्वसमिका 1C)
(iii) (2y + 5)(3y + 4) = 6y² + 8y + 15y + 20 = 6y² + 23y + 20
अतः –(2y + 5)(3y + 4) = –6y² – 23y – 20
(iv) (6x + 5y)² = (6x)² + 2(6x)(5y) + (5y)²
= 36x² + 60xy + 25y² (सर्वसमिका 1A)
(v) (2x – 1⁄2)² = (2x)² + (1⁄2)² – 2 × 2x × 1⁄2
= 4x² – 2x + 1⁄4 (सर्वसमिका 1B)
(vi) (7p) × (3r) × (p + 2) = 21pr (p + 2)
= 21p²r + 42pr

जाँच: (i) में p = 1 पर 0 × 12 = 0 और 1 + 10 – 11 = 0 ✓; (v) में x = 1 पर (1.5)² = 2.25 और 4 – 2 + 0.25 = 2.25 ✓

संकेत: (vi) में पहले दोनों एकल पदों को गुणा कीजिए। 7p × 3r = 21pr एक ही पद है, और उसके बाद ही कोष्ठक पर वितरण करना है।
प्र3.
प्रत्येक कथन के लिए उपयुक्त बीजीय व्यंजक या व्यंजकों की पहचान कीजिए। (i) एक वर्ग संख्या से दो अधिक व्यंजक: 2 + s, (s + 2)², s² + 2, s² + 4, 2s², 2²s (ii) दो क्रमागत संख्या के वर्गों का योग: m² + n², (m + n)², m² + 1, m² + (m + 1)², m² + (m – 1)², (m + (m + 1))², (2m)² + (2m + 1)²
उत्तर

(i) एक वर्ग संख्या से दो अधिक: s² + 2

व्यंजकवास्तव में क्या कहता है
2 + ss से दो अधिक — पर s का वर्ग संख्या होना आवश्यक नहीं
(s + 2)²“s से दो अधिक” का वर्ग
s² + 2वर्ग संख्या s² से दो अधिक ✓
s² + 4वर्ग संख्या से चार अधिक
2s²वर्ग संख्या का दुगुना
2²s4s, अर्थात s का चार गुना

(ii) दो क्रमागत संख्या के वर्गों का योग: m² + (m + 1)²

सूची में दो और व्यंजक भी ऐसा योग बताते हैं, और यह समझना उपयोगी है कि क्यों—

  • m² + (m – 1)² — यहाँ क्रमागत युग्म (m – 1) और m है। m के सभी मानों पर यह वही मानों का समूह देता है, अतः यह भी स्वीकार्य है।
  • (2m)² + (2m + 1)² — 2m और 2m + 1 क्रमागत हैं, अतः यह भी दो क्रमागत संख्याओं के वर्गों का योग है। परंतु यह केवल उन युग्मों तक पहुँचता है जो सम संख्या से आरंभ होते हैं, इसलिए कम व्यापक है।
  • m² + n² किन्हीं भी दो वर्गों का योग है; (m + n)² और (m + (m + 1))² योग के वर्ग हैं, वर्गों का योग नहीं; m² + 1 एक वर्ग में 1 जोड़ना है।
स्वयं जाँचिए: m = 4 पर m² + (m + 1)² = 16 + 25 = 41 = 4² + 5² ✓, जबकि (m + (m + 1))² = 81 = 9² — यह योग का वर्ग है, बिलकुल दूसरी राशि।
प्र4.
किसी कालदर्शक में संख्याओं के 2 गुणा 2 वर्ग पर विचार कीजिए जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। प्रत्येक विकर्ण पर स्थित संख्याओं के गुणनफल ज्ञात कीजिए — 4 × 12 = 48, 5 × 11 = 55। ऐसा ही अन्य 2 गुणा 2 वर्गों के लिए कीजिए। विकर्णों के गुणनफल के विषय में आप क्या अवलोकित करते हैं? समझाइए कि ऐसा क्यों होता है। संकेत— प्रत्येक 2 गुणा 2 वर्ग में संख्याओं को इस प्रकार नामांकित कीजिए: a, (a + 1), a + 7, (a + 8)
उत्तर

अवलोकन: कालदर्शक के प्रत्येक 2 गुणा 2 वर्ग में दोनों विकर्णों के गुणनफलों में ठीक 7 का अंतर रहता है। ऊपर-दाएँ × नीचे-बाएँ वाला गुणनफल बड़ा होता है।

2 × 2 वर्गa × (a + 8)(a + 1) × (a + 7)अंतर
4, 5 / 11, 124 × 12 = 485 × 11 = 557
3, 4 / 10, 113 × 11 = 334 × 10 = 407
16, 17 / 23, 2416 × 24 = 38417 × 23 = 3917
9, 10 / 16, 179 × 17 = 15310 × 16 = 1607

बीजगणित से कारण। संकेत के अनुसार नामांकित कीजिए: ऊपर a और a + 1; नीचे a + 7 और a + 8 (a के ठीक नीचे a + 7 आता है, क्योंकि सप्ताह में 7 दिन होते हैं)।

a (a + 8) = a² + 8a
(a + 1)(a + 7) = a² + 7a + a + 7 = a² + 8a + 7
अंतर = (a² + 8a + 7) – (a² + 8a) = 7
ऐसा क्यों होता है: दोनों गुणनफलों में a² + 8a समान रूप से है, क्योंकि 1 + 7 = 8 = 0 + 8। बचता है केवल कोने का गुणनफल 1 × 7 = 7, जो एक विकर्ण में है और दूसरे में नहीं। यह 7 सीधे सप्ताह की लंबाई से आया है।
प्रयास कीजिए: यही प्रयोग गुणन जाल के 2 गुणा 2 वर्ग पर कीजिए। वहाँ नाम pq, p(q + 1), (p + 1)q, (p + 1)(q + 1) होते हैं और दोनों विकर्ण-गुणनफल बराबर निकलते हैं। अंतर इसलिए है कि कालदर्शक में जोड़ चलता है और जाल में गुणा।
प्र5.
सत्यापित कीजिए कि निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं। (i) (k + 1) (k + 2) – (k + 3) का मान सदैव 2 होता है। (ii) (2q + 1) (2q – 3) का मान 4 का गुणज है। (iii) सम संख्याओं के वर्ग 4 के गुणज होते हैं और विषम संख्याओं के वर्ग 8 के गुणजों से 1 अधिक होते हैं। (iv) (6n + 2)² – (4n + 3)² का मान एक वर्ग संख्या से 5 कम होता है।
उत्तर

(i) असत्य।

(k + 1)(k + 2) – (k + 3) = k² + 3k + 2 – k – 3
= k² + 2k – 1

यह 2 केवल तब है जब k² + 2k – 3 = 0 हो, अर्थात k = 1 (या k = –3)। k = 2 पर मान 7 है और k = 3 पर 14।

(ii) असत्य।

(2q + 1)(2q – 3) = 4q² – 4q – 3
= 4(q² – q) – 3

यह 4 के किसी गुणज से 3 कम है, अतः 4 का गुणज कभी नहीं। वास्तव में 2q + 1 और 2q – 3 दोनों विषम हैं और विषम × विषम विषम होता है — यह 2 का गुणज भी नहीं। जाँच: q = 1 पर –3, q = 2 पर 5, q = 3 पर 21।

(iii) सत्य।

सम संख्या = 2n: (2n)² = 4n² — 4 का गुणज ✓
विषम संख्या = 2n + 1: (2n + 1)² = 4n² + 4n + 1
= 4n(n + 1) + 1

अब n और n + 1 क्रमागत हैं, अतः इनमें से एक सम है और n(n + 1) सम है। n(n + 1) = 2t रखने पर 4 × 2t + 1 = 8t + 1 — अर्थात 8 के गुणज से ठीक 1 अधिक ✓ (9 = 8 + 1, 25 = 24 + 1, 49 = 48 + 1, 81 = 80 + 1)।

(iv) असत्य।

(6n + 2)² – (4n + 3)² = (36n² + 24n + 4) – (16n² + 24n + 9)
= 20n² – 5

कथन सत्य होने के लिए 20n² को वर्ग संख्या होना चाहिए। परंतु 20n² = 4 × 5n² है और 5n² में अभाज्य 5 विषम बार आता है, अतः n = 0 को छोड़कर 20n² कभी पूर्ण वर्ग नहीं होता। n = 1 पर मान 15 है और 15 + 5 = 20 वर्ग संख्या नहीं है। अतः कथन केवल n = 0 की साधारण स्थिति में ही ठहरता है।

संकेत: एक उदाहरण के सही निकलने से कथन सिद्ध नहीं होता — (i) k = 1 पर सत्य है और शेष सब जगह असत्य। निर्णय प्रसार करने से ही होता है।
प्र6.
एक संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है और दूसरी संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 5 प्राप्त होता है। इनके योग, अंतर और गुणनफल को 7 से भाग देने पर शेषफल क्या प्राप्त होगा?
उत्तर

दोनों संख्याओं को दी गई शर्त के रूप में लिखिए—

n₁ = 7a + 3, n₂ = 7b + 5

योग

n₁ + n₂ = 7a + 7b + 8 = 7(a + b + 1) + 1
शेषफल = 1

अंतर

n₁ – n₂ = 7(a – b) + 3 – 5 = 7(a – b) – 2
= 7(a – b – 1) + 5
शेषफल = 5

(उल्टे क्रम में लेने पर n₂ – n₁ = 7(b – a) + 2, जिससे शेषफल 2 आता है।)

गुणनफल

n₁ n₂ = (7a + 3)(7b + 5)
= 49ab + 35a + 21b + 15
= 7(7ab + 5a + 3b + 2) + 1
शेषफल = 1

n₁ = 10, n₂ = 12 से जाँच: योग 22 = 7 × 3 + 1 ✓; अंतर 12 – 10 = 2 ✓; गुणनफल 120 = 7 × 17 + 1 ✓

ऐसा क्यों होता है: जिन पदों में 7 का गुणनखंड है वे भाग देने पर लुप्त हो जाते हैं। जो बचता है वह पूरी तरह शेषफल 3 और 5 से तय होता है — 3 + 5 = 8 से शेषफल 1 और 3 × 5 = 15 से शेषफल 1। इसीलिए शेषफलों को अलग से जोड़ा और गुणा किया जा सकता है।
प्र7.
तीन क्रमागत संख्याओं का चयन कीजिए। मध्य वाली संख्या का वर्ग कीजिए और शेष दो संख्याओं के गुणनफल को घटाइए। यही प्रक्रिया अन्य संख्याओं के समूहों के साथ भी दोहराइए। आपको कौन-सा प्रतिरूप दिखाई देता है? इसे बीजगणितीय समीकरण के रूप में किस प्रकार लिखेंगे? समीकरण के दोनों पक्षों का विस्तार करके जाँच कीजिए कि यह एक सही सर्वसमिका है।
उत्तर
तीन संख्याएँमध्य का वर्गशेष दो का गुणनफलअंतर
4, 5, 625241
9, 10, 11100991
19, 20, 214003991
–3, –2, –1431

प्रतिरूप: उत्तर सदैव 1 आता है।

समीकरण के रूप में। मध्य संख्या n मानिए, तब तीनों संख्याएँ n – 1, n, n + 1 हैं—

n² – (n – 1)(n + 1) = 1

दोनों पक्षों का प्रसार—

(n – 1)(n + 1) = n² – 1 (सर्वसमिका 1C)
n² – (n² – 1) = n² – n² + 1 = 1 ✓

प्रत्येक n के लिए दोनों पक्ष 1 हैं, अतः यह एक सही सर्वसमिका है।

ऐसा क्यों होता है: दोनों बाहरी संख्याएँ मध्य से बराबर दूरी 1 पर हैं, अतः सर्वसमिका 1C से उनका गुणनफल n² – 1² है। वह n² से ठीक 1 कम रहता है। यदि दोनों को दूरी d पर ले जाएँ तो अंतर d² हो जाएगा।
प्र8.
निम्नलिखित चरणों को दर्शाने वाला बीजीय व्यंजक क्या है? किन्हीं दो संख्याओं को जोड़िए। इस योगफल को दोनों संख्याओं के योगफल के आधे से गुणा कीजिए। सिद्ध कीजिए कि यह परिणाम दोनों संख्याओं के योग के वर्ग का आधा होगा।
उत्तर

दोनों संख्याएँ a और b मानिए।

चरण 1 — जोड़िए: a + b
चरण 2 — योग के आधे से गुणा कीजिए: (a + b) × 1⁄2 (a + b)
व्यंजक: 1⁄2 (a + b)²

उपपत्ति।

(a + b) × 1⁄2 (a + b) = 1⁄2 × (a + b)(a + b)
= 1⁄2 (a + b)²
= 1⁄2 (a² + 2ab + b²)
= a²⁄2 + ab + b²⁄2

यह ठीक (a + b)² का आधा है — अर्थात दोनों संख्याओं के योग के वर्ग का आधा।

a = 3, b = 5 पर जाँच: योग = 8, योग का आधा = 4, गुणनफल = 32; और 1⁄2 × 8² = 32 ✓

ऐसा क्यों होता है: दोनों चरण मिलकर योग को स्वयं से और 1⁄2 से गुणा करते हैं। चूँकि गुणा को किसी भी क्रम में समूहित किया जा सकता है, यह पहले योग का वर्ग करके बाद में आधा करने के समान ही है।
प्र9.
कौन-सा व्यंजक बड़ा है? गुणनफल की पूर्ण गणना किए बिना ज्ञात कीजिए। (i) 14 × 26 या 16 × 24 (ii) 25 × 75 या 26 × 74
उत्तर

(i) 16 × 24 बड़ा है। एक से दूसरे तक पहुँचकर तुलना कीजिए।

14 × 26 = (16 – 2)(24 + 2)
= 16 × 24 + 16 × 2 – 2 × 24 – 2 × 2
= 16 × 24 + 32 – 48 – 4
= 16 × 24 – 20

अतः 14 × 26, 16 × 24 से 20 कम है। (वास्तव में 364 और 384।)

(ii) 26 × 74 बड़ा है।

25 × 75 = (26 – 1)(74 + 1)
= 26 × 74 + 26 – 74 – 1
= 26 × 74 – 49

अतः 25 × 75, 26 × 74 से 49 कम है। (वास्तव में 1875 और 1924।)

ऐसा क्यों होता है: दोनों युग्मों का योग समान है (14 + 26 = 16 + 24 = 40; 25 + 75 = 26 + 74 = 100)। जिन युग्मों का योग नियत हो उनमें गुणनफल तब सबसे बड़ा होता है जब दोनों संख्याएँ एक-दूसरे के सबसे निकट हों — सर्वसमिका 1C इसे ठीक-ठीक कहती है: युग्म (c – d, c + d) का गुणनफल c² – d² है, जो d बढ़ने पर घटता जाता है।
स्वयं जाँचिए: योग 40 के लिए गुणनफल हैं 20 × 20 = 400, 19 × 21 = 399, 18 × 22 = 396, 16 × 24 = 384, 14 × 26 = 364 — कमी 1, 4, 16, 36 अर्थात मध्य से दूरी के वर्ग।
प्र10.
धौली में एक छोटा पार्क बनाया जा रहा है। इसकी योजना चित्र में दर्शाई गई है। दो वर्गाकार भूखंडों में जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल g² वर्ग फुट है, जहाँ हरियाली होगी। शेष संपूर्ण क्षेत्र (w फुट चौड़ा) एक पैदल मार्ग है जिस पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र के लिए एक व्यंजक लिखिए जिस पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है।
उत्तर

योजना को लंबाई और चौड़ाई दोनों दिशाओं में पढ़िए। मार्ग पार्क के चारों ओर है और दोनों हरे वर्गों के बीच भी, जहाँ दो मार्ग-चौड़ाइयाँ मिलती हैं।

लंबाई = w + g + 2w + g + w = 2g + 4w फुट
चौड़ाई = w + g + w = g + 2w फुट
g² वर्ग फुट g² वर्ग फुट 2w w w w w 2g + 4w
पार्क: w फुट चौड़े मार्ग के भीतर g × g के दो हरे भूखंड, जिनके बीच 2w की दूरी है।
पूरे पार्क का क्षेत्रफल = (2g + 4w)(g + 2w)
= 2g² + 4gw + 4gw + 8w²
= 2g² + 8gw + 8w²

हरियाली = 2g²
टाइल्स लगाने का क्षेत्रफल = 2g² + 8gw + 8w² – 2g²
= 8gw + 8w² = 8w(g + w) वर्ग फुट

संख्याओं से जाँच: g = 10, w = 2 → पार्क 28 × 14 = 392 वर्ग फुट, हरियाली 200 वर्ग फुट, मार्ग 192 वर्ग फुट; और 8 × 2 × 12 = 192 ✓

ऐसा क्यों होता है: पार्क ठीक (g + 2w) भुजा के दो वर्गों को साथ-साथ रखने से बनता है, अतः उसका क्षेत्रफल 2(g + 2w)² है। इसलिए टाइल्स का क्षेत्रफल 2[(g + 2w)² – g²] हुआ, और सर्वसमिका 1C उस कोष्ठक को तुरंत (2g + 2w)(2w) बना देती है — जिससे 8w(g + w) मिल जाता है।
प्र11.
नीचे दर्शाए गए प्रत्येक प्रतिरूप के लिए— (i) अनुक्रम में अगली आकृति बनाइए। (ii) चरण 10 में कितनी मूल इकाइयाँ होंगी? (iii) चरण y में मूल इकाइयों की संख्या का वर्णन करने के लिए एक व्यंजक लिखिए।
उत्तर

प्रतिरूप (क) — पीली S आकार की आकृतियाँ। प्रत्येक आकृति (y + 2) भुजा के वर्ग को ही पुनर्व्यवस्थित करके बनी है: y पंक्तियों और (y + 2) स्तंभों का एक ब्लॉक, जिसकी ऊपरी पंक्ति को दाईं ओर खड़ी भुजा बनाकर ऊपर उठाया गया है और निचली पंक्ति को बाईं ओर खड़ी भुजा बनाकर नीचे लटकाया गया है।

चरण yब्लॉकदोनों भुजाएँकुल
11 × 3 = 33 + 39 = 3²
22 × 4 = 84 + 416 = 4²
33 × 5 = 155 + 525 = 5²
4 (अगली आकृति)4 × 6 = 246 + 636 = 6²
चरण y में मूल इकाइयाँ = y(y + 2) + 2(y + 2)
= (y + 2)(y + 2) = (y + 2)²
चरण 10: (10 + 2)² = 144 इकाइयाँ
प्रतिरूप (क) का चरण 4 (रूपरेखा): 4 × 6 का ब्लॉक, ऊपर 6 की भुजा और नीचे 6 की भुजा — कुल 36 इकाइयाँ।

प्रतिरूप (ख) — नीले वर्ग। प्रत्येक आकृति (y + 1) × (y + 1) का पूरा ब्लॉक है और उसके नीचे y इकाइयों की एक अधूरी पंक्ति।

चरण yब्लॉकअतिरिक्त पंक्तिकुल
12² = 415
23² = 9211
34² = 16319
4 (अगली आकृति)5² = 25429
चरण y में मूल इकाइयाँ = (y + 1)² + y = y² + 3y + 1
चरण 10: 11² + 10 = 121 + 10 = 131 इकाइयाँ
ऐसा क्यों होता है: दोनों प्रतिरूपों में आकृति “एक वर्ग, थोड़े फेरबदल के साथ” है। पहले वर्ग को पहचान लेना — (क) में (y + 2)² और (ख) में (y + 1)² — चित्र गिनने की समस्या को एक पंक्ति के व्यंजक में बदल देता है, और भाग 6.4 का पूरा उद्देश्य यही है।
संकेत: छपी हुई पुस्तक में प्रतिरूप (क) के चरण 3 की प्रत्येक भुजा में पाँच के स्थान पर छह वर्ग दिखते हैं, जिससे 25 के बदले 27 बन जाता है। चरण 1 और चरण 2 दोनों (y + 2)² से पूर्णतः मेल खाते हैं, अतः भुजाओं को (y + 2) इकाई लंबा पढ़िए — प्रतिरूप का अभीष्ट उत्तर (y + 2)² ही है।
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