प्र1.
हम इसका प्रसार किस प्रकार करें? [(a + 1) (b + 1)]
उत्तर
पूरे कोष्ठक (a + 1) को एक एकल पद मानिए और दूसरे कोष्ठक पर वितरण गुणधर्म लगाइए।
(a + 1)(b + 1) = (a + 1) b + (a + 1) 1
= (ab + b) + (a + 1)
= ab + a + b + 1
= (ab + b) + (a + 1)
= ab + a + b + 1
अतः गुणनफल ab में a + b + 1 की वृद्धि होती है।
ऐसा क्यों होता है: वितरण गुणधर्म को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि “एकल संख्या” a क्या है — वह स्वयं एक कोष्ठक भी हो सकता है। एक बार प्रयोग करने पर दूसरा कोष्ठक खुलता है, दूसरी बार प्रयोग करने पर पहला, और तब एक कोष्ठक का प्रत्येक पद दूसरे के प्रत्येक पद से मिल चुका होता है।