गणित प्रकाश अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप समझ सकते हैं कि एक संख्या या दोनों संख्याओं में कमी करने पर इस सर्वसमिका का प्रयोग किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर

हाँ — कमी करना, ऋणात्मक संख्या की वृद्धि करना ही है, अतः किसी नई सर्वसमिका की आवश्यकता नहीं।

(a + 1)(b – 1) = (a + 1)(b + (–1))
सर्वसमिका 1 में m = 1, n = –1 लीजिए—
ab + (1) × b + a × (–1) + (1) × (–1)
= ab + b – a – 1

यह ठीक वही व्यंजक है जो पहले सीधे प्रसार से मिला था।

ऐसा क्यों होता है: पूर्णांक गुणन के नियम (धनात्मक × ऋणात्मक = ऋणात्मक, ऋणात्मक × ऋणात्मक = धनात्मक) चारों पदों पर सही चिह्न स्वयं लगा देते हैं। इसीलिए एक ही सर्वसमिका चार स्थितियाँ सँभाल लेती है — दोनों में वृद्धि, दोनों में कमी, तथा एक में वृद्धि व दूसरी में कमी की दोनों स्थितियाँ।
प्र2.
सर्वसमिका 1 का प्रयोग करके ज्ञात कीजिए कि गुणनफल में किस प्रकार परिवर्तन होता है जब — (i) एक संख्या में 2 की कमी की जाती है और दूसरी संख्या में 3 की वृद्धि की जाती है। (ii) दोनों संख्याओं में से एक में 3 की कमी तथा दूसरी में 4 की कमी की जाती है। व्यवकलन (घटाव) को योग (जोड़) में परिवर्तन किए बिना गुणनफल ज्ञात कीजिए एवं उत्तरों की जाँच कीजिए।
उत्तर

(i) m = –2, n = 3 लीजिए।

(a – 2)(b + 3) = ab + (–2)b + 3a + (–2)(3)
= ab + 3a – 2b – 6

घटाव को वैसा ही रखकर सीधी जाँच: (a – 2)(b + 3) = a(b + 3) – 2(b + 3) = ab + 3a – 2b – 6 ✓

(ii) m = –3, n = –4 लीजिए।

(a – 3)(b – 4) = ab + (–3)b + (–4)a + (–3)(–4)
= ab – 4a – 3b + 12

सीधी जाँच: (a – 3)(b – 4) = a(b – 4) – 3(b – 4) = ab – 4a – 3b + 12 ✓

स्वयं जाँचिए: a = 10, b = 10 रखिए। (i) 8 × 13 = 104 और 100 + 30 – 20 – 6 = 104। (ii) 7 × 6 = 42 और 100 – 40 – 30 + 12 = 42।
प्र3.
विस्तार कीजिए (i) (a – u) (b + v), (ii) (a – u) (b – v)
उत्तर

पहले कोष्ठक का प्रत्येक पद, दूसरे के प्रत्येक पद से गुणा होता है; चिह्न पूर्णांक-नियमों से आते हैं।

(i) (a – u)(b + v) = a·b + a·v + (–u)·b + (–u)·v
= ab – ub + av – uv
(ii) (a – u)(b – v) = a·b + a·(–v) + (–u)·b + (–u)(–v)
= ab – ub – av + uv

(ii) की जाँच a = 7, u = 2, b = 9, v = 3 पर: बायाँ पक्ष = 5 × 6 = 30; दायाँ पक्ष = 63 – 18 – 21 + 6 = 30 ✓

ऐसा क्यों होता है: (ii) में घटाए गए दोनों भाग ub और av कोने के आयत uv पर एक-दूसरे को ढकते हैं, इसलिए वह कोना दो बार घट जाता है। + uv जोड़ने पर वह केवल एक बार घटता है — यही हिसाब आगे (a – b)² = a² – 2ab + b² देगा।
प्र4.
उदाहरण 1— 3a⁄2 (a – b + 1⁄5) को विस्तारित रूप में लिखिए।
उत्तर

वितरण गुणधर्म एक कोष्ठक के भीतर दो पदों तक सीमित नहीं है — प्रत्येक पद से गुणा होता है।

3a⁄2 (a – b + 1⁄5) = (3a⁄2 × a) – (3a⁄2 × b) + (3a⁄2 × 1⁄5)

अब घातांक संकेतन से प्रत्येक पद सरल कीजिए—

3a⁄2 × a = 3⁄2 × (a × a) = 3⁄2 a²
3a⁄2 × b = 3⁄2 × (a × b) = 3⁄2 ab
3a⁄2 × 1⁄5 = (3⁄2 × 1⁄5) a = 3⁄10 a
3a⁄2 (a – b + 1⁄5) = 3⁄2 a² – 3⁄2 ab + 3⁄10 a

a = 2, b = 1 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 3 × (2 – 1 + 0.2) = 3.6; दायाँ पक्ष = 6 – 3 + 0.6 = 3.6 ✓

संकेत: तीनों पदों की चर संख्याएँ भिन्न हैं (a², ab, a), अतः वे समान पद नहीं हैं और व्यंजक पहले ही अपने सरलतम रूप में है।
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