हाँ — कमी करना, ऋणात्मक संख्या की वृद्धि करना ही है, अतः किसी नई सर्वसमिका की आवश्यकता नहीं।
सर्वसमिका 1 में m = 1, n = –1 लीजिए—
ab + (1) × b + a × (–1) + (1) × (–1)
= ab + b – a – 1
यह ठीक वही व्यंजक है जो पहले सीधे प्रसार से मिला था।
अद्यतन2026-09-05
हाँ — कमी करना, ऋणात्मक संख्या की वृद्धि करना ही है, अतः किसी नई सर्वसमिका की आवश्यकता नहीं।
यह ठीक वही व्यंजक है जो पहले सीधे प्रसार से मिला था।
(i) m = –2, n = 3 लीजिए।
घटाव को वैसा ही रखकर सीधी जाँच: (a – 2)(b + 3) = a(b + 3) – 2(b + 3) = ab + 3a – 2b – 6 ✓
(ii) m = –3, n = –4 लीजिए।
सीधी जाँच: (a – 3)(b – 4) = a(b – 4) – 3(b – 4) = ab – 4a – 3b + 12 ✓
पहले कोष्ठक का प्रत्येक पद, दूसरे के प्रत्येक पद से गुणा होता है; चिह्न पूर्णांक-नियमों से आते हैं।
(ii) की जाँच a = 7, u = 2, b = 9, v = 3 पर: बायाँ पक्ष = 5 × 6 = 30; दायाँ पक्ष = 63 – 18 – 21 + 6 = 30 ✓
वितरण गुणधर्म एक कोष्ठक के भीतर दो पदों तक सीमित नहीं है — प्रत्येक पद से गुणा होता है।
अब घातांक संकेतन से प्रत्येक पद सरल कीजिए—
a = 2, b = 1 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 3 × (2 – 1 + 0.2) = 3.6; दायाँ पक्ष = 6 – 3 + 0.6 = 3.6 ✓