गणित प्रकाश अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किसी संख्या (कितने भी अंकों की कोई संख्या) को 11 से गुणा करने का सामान्य नियम बताइए तथा गुणनफल को एक पंक्ति में लिखिए।
उत्तर

नियम। इकाई का अंक ज्यों-का-त्यों लिखिए। फिर बाईं ओर बढ़ते हुए प्रत्येक पड़ोसी अंक-युग्म का योग लिखिए। अंत में सबसे बाएँ वाला अंक लिखिए। हासिल सामान्य ढंग से लीजिए।

… d c b a के लिए—
इकाई का अंक → a
दहाई का अंक → a + b
सैकड़े का अंक → b + c
हजार का अंक → c + d
अगला अंक → d
गुणनफल = d | (c + d) | (b + c) | (a + b) | a (हासिल सहित)

3874 × 11 के चरण, दाएँ से बाएँ—

चरणजोड़े गए अंकअब तक लिखा
144
27 + 4 = 11 → 1 लिखिए, 1 हासिल14
38 + 7 + 1 = 16 → 6 लिखिए, 1 हासिल614
43 + 8 + 1 = 12 → 2 लिखिए, 1 हासिल2614
53 + 1 = 442614
ऐसा क्यों होता है: N × 11 = N × 10 + N, और एक स्थान के खिसकाव के कारण उस जोड़ का प्रत्येक स्तंभ N के दो सटे हुए अंकों का युग्म बन जाता है। इसमें कहीं भी N के अंकों की संख्या का उपयोग नहीं हुआ, अतः नियम किसी भी लंबाई की संख्या पर लागू होता है।
प्र2.
गणना कीजिए— (i) 94 × 11 (ii) 495 × 11 (iii) 3279 × 11 (iv) 4791256 × 11
उत्तर
(i) 9 | 9 + 4 | 4 = 9 | 13 | 4 → हासिल 1 → 1034
(ii) 4 | 4 + 9 | 9 + 5 | 5 = 4 | 13 | 14 | 5 → 5445
(iii) 3 | 3 + 2 | 2 + 7 | 7 + 9 | 9 = 3 | 5 | 9 | 16 | 9 → 36069
(iv) 4 | 4+7 | 7+9 | 9+1 | 1+2 | 2+5 | 5+6 | 6
= 4 | 11 | 16 | 10 | 3 | 7 | 11 | 6 → 52703816

सामान्य विधि से जाँच: 94 × 11 = 940 + 94 = 1034 ✓; 495 × 11 = 4950 + 495 = 5445 ✓; 3279 × 11 = 32790 + 3279 = 36069 ✓; 4791256 × 11 = 47912560 + 4791256 = 52703816 ✓

संकेत: हासिल दाईं ओर से लीजिए, ठीक साधारण जोड़ की तरह — (iii) में 16 से 6 लिखकर 1 हासिल 9 में जाता है, जिससे 10 बनता है और आगे फिर हासिल जाता है।
प्र3.
किसी संख्या को 101 से गुणा करने के लिए भी क्या हम ऐसा ही नियम बना सकते हैं?
उत्तर

हाँ — ठीक उसी कारण से।

N × 101 = N (100 + 1) = N × 100 + N

100 से गुणा करने पर प्रत्येक अंक दो स्थान खिसकता है, अतः जोड़ में प्रत्येक स्तंभ पड़ोसी अंकों का नहीं बल्कि दो स्थान दूर के अंकों का युग्म बनता है।

ऐसा क्यों होता है: 11 के नियम से केवल खिसकाव की मात्रा बदली है। जब भी गुणक 10k + 1 के रूप का हो, नियम बन जाता है “k स्थान दूर के अंक जोड़िए”।
प्र4.
3874 को 101 से गुणा कीजिए।
उत्तर
3874 × 101 = 3874 (100 + 1) = 387400 + 3874 = 391274

dcba = 3874 लेकर स्तंभ-योग के रूप में—

387400d c b a 0 0
+   3874+     d c b a
391274d, c, (b + d), (a + c), b, a
प्र5.
उपर्युक्त व्यंजक का प्रयोग 3874 × 101 का मान (गुणनफल) एक पंक्ति में ज्ञात करने के लिए कीजिए।
उत्तर

अंक पढ़िए: d = 3, c = 8, b = 7, a = 4 और प्रतिरूप d | c | (b + d) | (a + c) | b | a लगाइए।

3 | 8 | (7 + 3) | (4 + 8) | 7 | 4
= 3 | 8 | 10 | 12 | 7 | 4
हासिल: 12 → 2 लिखिए, 1 हासिल; 10 + 1 = 11 → 1 लिखिए, 1 हासिल; 8 + 1 = 9
= 391274

जाँच: 387400 + 3874 = 391274 ✓

प्र6.
किसी संख्या को 101 से एक ही पंक्ति में गुणा करने और गुणनफल को लिखने का सामान्य नियम क्या हो सकता है? 1001, 10001......... से गुणा करने के लिए इस नियम का विस्तार कीजिए।
उत्तर

101 से: अंतिम दो अंक ज्यों-के-त्यों लिखिए, फिर आगे प्रत्येक स्थान पर उस स्थान के अंक और उससे दो स्थान दाईं ओर के अंक का योग लिखिए; अंत में सबसे बाएँ के दो अंक। संकेत रूप में dcba × 101 = d | c | (b + d) | (a + c) | b | a।

1001 से: खिसकाव तीन स्थान का है, अतः तीन स्थान दूर के अंक जुड़ते हैं—

dcba × 1001 = dcba (1000 + 1) = dcba000 + dcba
= d | c | b | (a + d) | c | b | a

10001 से: खिसकाव चार स्थान का है। चार अंकों की संख्या dcba के लिए दोनों प्रतियाँ आपस में मिलती ही नहीं—

dcba × 10001 = dcba0000 + dcba = dcba dcba
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक स्थिति में गुणक 10k + 1 है, अतः गुणनफल “संख्या को k स्थान खिसकाकर” और “संख्या” जोड़ने से बनता है। दोनों प्रतियाँ कितनी ढकती हैं, यह केवल इस पर निर्भर है कि k, संख्या के अंकों की तुलना में कितना बड़ा है।
संकेत: यही विचार 10k – 1 पर भी चलता है। 99 = 100 – 1 और 999 = 1000 – 1 हैं, अतः N × 99 = N00 – N तथा N × 999 = N000 – N।
प्र7.
उपर्युक्त नियम का प्रयोग करके निम्नलिखित का गुणनफल ज्ञात कीजिए। (i) 89 × 101 (ii) 949 × 101 (iii) 265831 × 1001 (iv) 1111 × 1001 (v) 9734 × 99 (vi) 23478 × 999
उत्तर
(i) 89 × 101 = 8900 + 89 = 8989 (दो अंकों की संख्या दोहरा जाती है)
(ii) 949 × 101 = 94900 + 949 = 95849
अंक-नियम से: 9 | 4 | (9 + 9) | 4 | 9 = 9 | 4 | 18 | 4 | 9 → 95849 ✓
(iii) 265831 × 1001 = 265831000 + 265831 = 266096831
(iv) 1111 × 1001 = 1111000 + 1111 = 1112111
(v) 9734 × 99 = 9734 (100 – 1) = 973400 – 9734 = 963666
(vi) 23478 × 999 = 23478 (1000 – 1) = 23478000 – 23478 = 23454522
क्या आप जानते हैं? ब्रह्मगुप्त (628 सामान्य संवत्) ने इन विधियों को इष्टगुणन कहा — “अपनी इच्छा की (सुविधाजनक) संख्या से गुणन”। श्रीधराचार्य (750 सामान्य संवत्) और भास्कराचार्य (लीलावती, 1150 सामान्य संवत्) ने भी इनकी चर्चा की है। इनमें से प्रत्येक विधि वितरण गुणधर्म ही है — गुणक को ऐसे भागों में तोड़िए जिन पर काम करना सरल हो।
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